ADR की रिपोर्ट: यूपी-बिहार में ‘लचर सरकार’

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लखनऊ\बिहार: लोकसभा चुनाव के मौसम में राजनीतिक सुधारों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डैमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) ने ऑल इंडिया सर्वे रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट से पता चलता है कि देशभर में केंद्र से लेकर राज्य सरकारों का प्रदर्शन औसत से भी खराब रहा है। एडीआर की ओर से यह सर्वे देश की 534 संसदीय सीटों पर किया गया। देश भर की जनता ने इस दौरान अपनी प्राथमिकताएं बताईं। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक यूपी-बिहार में लचर सरकार है क्योंकि सर्वे दौरान मतदाता अपनी सरकारों के कामकाज से नाखुश दिखे।

PunjabKesariयोगी सरकार का प्रदर्शन औसत से नीचे
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक मतदाताओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन खराब रहा है यानी औसत से भी नीचे रहा है। राज्य की जनता की अपेक्षाओं को सत्ताधारी दल ने नजरअंदाज किया है। इन मुद्दों में रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सुविधा एवं कानून-व्यवस्था शामिल हैं। मतदाताओं ने कहा कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता रोजगार के अवसर (42.82 प्रतिशत), अच्छे अस्पताल एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (34.56 प्रतिशत) और बेहतर कानून व्यवस्था (33.74 प्रतिशत) हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं की शीर्ष प्राथमिकता में कृषि कर्ज की उपलब्धता (44 प्रतिशत), कृषि के लिए बिजली (44 प्रतिशत) और रोजगार के अवसर (39 प्रतिशत) रही और लोगों के बीच सरकार का प्रदर्शन इन सभी क्षेत्रों में औसत दर्जे से भी कम पाया गया।

PunjabKesariनीतीश सरकार से जनता नाखुश
एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार का प्रदर्शन लचर रहा है। राज्य की जनता नीतीश सरकार के कामकाज से खुश नहीं है। वोटर्स ने रोजगार को 49.95 प्रतिशत के साथ अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया। वहीं खेती के लिए पानी की उपलब्धता (41.43 प्रतिशत) को दूसरे, जबकि अच्छे अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधा (39.09 प्रतिशत) को तीसरे नंबर की प्राथमिकता बताया। सरकार जन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है। जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का खराब प्रदर्शन मिला है।

PunjabKesariप्राथमिक सहूलियतों में गुजरात फिसड्डी
एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक विकास और सुशासन की जिस नाव पर सवार होकर वर्ष 2014 में उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी वैतरणी पार कर दिल्ली की सत्ता हासिल की थी उनका गुजरात लोगों तक प्राथमिक सहूलियतों को पहुंचाने के मामले में औसत से नीचे यानी फिसड्डी साबित हुआ है। प्रदेश की 26 में से महज 7 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां किसी एक सैग्मैंट में सरकार का प्रदर्शन सराहनीय रहा हो। बेहतर प्रदर्शन के मामले में सूरत समेत दक्षिण गुजरात की एक भी लोकसभा सीट शामिल नहीं है। प्रदूषण का मामला हो या स्वच्छ पानी, कृषि सहूलियतों, ऊर्जा यहां तक कि रोजगार मुहैया कराने के मामले में भी गुजरात का प्रदर्शन औसत से नीचे है। यही नहीं गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत भी सर्वे में पिछड़ी हुई पाई गई।

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