आम्रपाली का अस्पताल हुआ नीलाम, डॉक्टरों ने इतने में बोली लगाकर खरीदा

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आम्रपाली ग्रुप की सम्पत्तियों की नीलामी शुरू हो गई है। रविवार को सबसे पहले ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली अस्पताल की नीलामी की गई है। अस्पताल में ही काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों के समूह ने सबसे ज्यादा 13.94 करोड़ की बोली लगाकर अस्पताल खरीदा है।

दिल्ली-एनसीआर के अलावा यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के 16 शहरों में आम्रपाली समूह की 31 सम्पत्तियों को नीलामी के लिए डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) को सौंपा गया है। डीआरटी ने अस्पताल के लिए आरक्षित मूल्य 13.73 करोड़ रुपये तय किया था। तीन लोगों ने बोली लगाई। इसमें अस्पताल के डॉक्टरों ने ही सबसे ज्यादा 13.94 करोड़ की बोली लगाई। अभी अस्पताल की मशीनरी नीलाम की जाएगी। दूसरी ओर नोएडा सेक्टर-62 में आम्रपाली समूह के 5 कॉरपोरेट टॉवर हैं। इनमें से टॉवर नम्बर 3 के लिए भी बोली लगाईगई है पर अभी परिणाम नहीं आया है।

आम्रपाली के कई ठिकानों पर छापेमारी

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आम्रपाली समूह पर रविवार को दोतरफा शिकंजा कसा गया। नोएडा में अस्पताल की नीलामी हुई तो प्रीत विहार में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सबूत जुटाने के लिए छापे मारे। ईओडब्ल्यू ने आम्रपाली के मुख्य वित्त नियंत्रक और चार्टर्ड एकाउंटेंट के ठिकानों से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

आम्रपाली के मुख्य प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और दो अन्य निदेशकों की गिरफ्तारी के बाद रविवार को बड़ी कार्रवाई की गई। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आम्रपाली समूह के सीएफओ चन्दर वाधवा के प्रीत विहार (दिल्ली) स्थित घर पर छापेमारी की। दूसरी टीम ने सीए अनिल मित्तल के रामप्रस्थ स्थित घर पर रेड की। दोनों अधिकारियों के ठिकानों पर शनिवार को भी छापे मारे गए थे। ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के मुताबिक चन्दर वाधवा और अनिल मित्तल के घरों से बड़ी संख्या में दस्तावेज, कम्प्यूटर, लैपटॉप, पेन ड्राइव और हार्ड ड्राइव जब्त की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेकर गिरफ्तार किए गए सीएमडी अनिल शर्मा, निदेशक अजय कुमार और शिवप्रिया को ईओडब्ल्यू सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश करेगी। तीनों को अदालत ने 4 मार्च तक रिमांड पर दिया था। रिमांड 8 दिन और बढ़ाने की मांग करेगी।

कीमतों पर असमंसस

डीआरटी ने नीलामी के लिए सारी सम्पत्तियों की अलग-अलग कीमतें तय कर दी हैं। लेकिन मूल्यांकन को लेकर दो मत बने हुए हैं। खरीदार इन कीमतों को ज्यादा बता रहे हैं। शायद इसी कारण बाजार सम्पत्तियों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं ले *रहा है। खरीदारों का तर्क है कि आम्रपाली के प्रबंधन अपनी देनदारी घटाने के लिए सम्पत्तियों की कीमतें ज्यादा बताई थीं।

 

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