महाबलिपुरम में दो महाबलियों का होगा मिलन, अनौपचारिक बातचीत में मोदी की औपचारिक कूटनीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 व 12 अक्टूबर को तमिलनाडु के तटीय शहर महाबलीपुरम में आयोजित होने वाले दूसरे द्विपक्षीय अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी करेंगे। यह पहली बार नहीं है कि मोदी राष्ट्रीय राजधानी के बाहर किसी विदेशी नेता की मेजबानी कर रहे हैं, जो पहले मानदंड हुआ करता था। मोदी ने हमेशा से यह कहा है कि दुनिया के सामने भारत की सुंदरता और संस्कृति को दर्शाने के लिए हमें अन्य राज्यों को भी महत्व देना चाहिए। इस तरह, उन्होंने सही मायने में दुनिया के लिए ‘अतुल्य भारत’ के दरवाजे खोल दिए हैं।

मोदी ने पिछले पांच वर्षो में कूटनीति में परिवर्तनकारी बदलाव के अलावा गणमान्य व्यक्तियों को देश के विभिन्न हिस्सों में आतिथ्य का पहला अनुभव दिया गया है, जिसने विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति, विरासत और विविधता को बढ़ावा देने में मदद की है।अत्याधुनिक तकनीक से लेकर प्राचीन भारतीय विरासत, आध्यात्मिकता से लेकर वास्तुकला तक, हमारे अतिथियों ने भारत की जीवंत संस्कृति को देखा है। इस प्रक्रिया में विदेशी गणमान्य लोगों ने देशभर के विभिन्न राज्यों का दौरा किया। इससे राज्यों को दुनिया के सामने अपनी परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला।

हाल के दिनों में मोदी ने अहमदाबाद में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे और उनकी पत्नी की मेजबानी की थी, जहां उन्होंने साबरमती आश्रम और सीदी सैय्यद मस्जिद का दौरा किया था।फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मिर्जापुर का दौरा किया था। जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल का बेंगलुरू के बॉश रिसर्च सेंटर में स्वागत किया गया, जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत भी अहमदाबाद में किया गया था।

मोदी ने चंडीगढ़ में पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रेंकोइस ओलांद की मेजबानी की थी, जहां उन्होंने रॉक गार्डन का दौरा किया था। इसके अलावा पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन नोएडा में, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की मेजबानी हैदराबाद में की गई थी।इसके अलावा भी पिछले दिनों ऐसे कई विदेशी गणमान्य लोगों का भारत के विभिन्न हिस्सों में स्वागत किया गया। इससे इन राज्यों को विश्व स्तर पर अपनी संस्कृति की झलक दिखाने का मौका मिल सका।

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