भारत को मिला सबसे बड़ा ‘शत्रु संहारक’ राफेल, दुश्मनों का हौसला होगा पस्त

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विजयादशमी के दिन भारत ने दुनिया के सबसे मारक लड़ाकू जेट विमान राफेल को औपचारिक तौर पर हासिल कर लिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस में एक गरिमापूर्ण समारोह में इस बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित राफेल विमान को प्राप्त किया। इस दौरान दुनिया भर की लगी निगाहों के बीच पूजा के बाद राजनाथ सिंह ने राफेल में उड़ान भी भरी।

रक्षामंत्री ने राफेल विमान का विधि विधान पूर्वक शस्त्र पूजन कर भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत में हो रहे इस इजाफे का शंखनाद किया। राफेल में लगभग आधे घंटे की उड़ान भर कर राजनाथ सिंह ने भारत के बढ़ते सैन्य पराक्रम का भी संदेश दिया। राफेल हासिल करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना की गर्जना ही तेज नहीं होगी बल्कि इसे बेहद मजबूती मिलेगी। रक्षामंत्री ने कहा कि राफेल मिलने के साथ ही भारत-फ्रांस के रणनीतिक और सामरिक रिश्ते के नये दौर की शुरूआत हो गई है।

फ्रेंच में राफेल का अर्थ ‘आंधी’

फ्रांस के मेरीनेक एयरबेस पर राफेल बनाने वाली कंपनी दॅासौ और फ्रांसीसी सैन्य मंत्री की मौजूदगी में हुए समारोह में राजनाथ सिंह को राफेल सौंपने की औपचारिकता पूरी की गई। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने राफेल को ‘आंधी’ बताते हुए कहा कि ये अपने नाम के हिसाब से हमारी वायुसेना को मजबूत करेगा। फ्रेंच भाषा में राफेल का अर्थ आंधी होता है और सिंह ने इसका भी जिक्र किया।

भारतीय वायुसेना के लिए ऐतिहासिक दिन

राजनाथ ने कहा कि आज भारतीय सुरक्षाबलों के लिए ऐतिहासिक दिन है। भारत में आज विजयादशमी यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन है। वहीं आज 87वां वायुसेना दिवस भी है। रक्षा मंत्री ने कहा हमारा फोकस वायुसेना की क्षमता बढ़ाने पर है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सभी राफेल विमान की तय समय सीमा पर डिलिवरी हो जाएगी।

विधि विधान से शस्त्र पूजन कर लिखा ओम

राफेल हासिल करने के बाद राजनाथ सिंह ने पूरी भारतीय परंपरा और विधि विधान से शस्त्र पूजा की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने विमान के अगले हिस्से पर कुमकुम का तिलक लगाया औरओम लिखा। फूल और नारियल भी रखे गए। पूजा विधि के अनुसार विमान के पंख में सिंह ने रक्षा सूत्र बांधा। राफेल के शस्त्र पूजा के दौरान बुरी नजर से बचाने के लिए दोनों पहियों के नीचे नींबू भी रखा गया। 

वायुसेना अध्यक्ष के नाम पर पहला राफेल

राफेल के पहले विमान आरबी 001 को हासिल करने के साथ ही इस बेहद मारक लड़ाकू जेट के भारत आने की उलटी गिनती भी शुरु हो गई है। भारतीय वायुसेना के पायलट राफेल उड़ाने और इसके तकनीकी प्रबंधन का प्रशिक्षण हासिल करने के लिए पहले ही फ्रांस पहुंच गए है। राफेल से 1500 घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद इस विमान को मई 2020 में भारत लाया जाएगा। चार राफेल विमानों का पहला जत्था भारतीय वायुसेना को अगले साल मई में मिलेगा। एक रोचक तथ्य यह है कि भारतीय वायुसेना के पहले राफेल लड़ाकू विमान के पिछले हिस्से यानि टेल पर आरबी 01 लिखा है। यह नए वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेस भदौरिया के नाम पर है।

अलग-अलग एयरबेस पर होंगे तैनात

भारत को मिलने वाले 36 विमानों की डील में से पहले चार अंबाला एयरबेस पर तैनात किये जाएंगे। पहले 16 राफेल को वायुसेना की 17वी स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज में शामिल किया जाएगा, साल 1999 के करगिल युद्ध के दौरान हीरो बनकर उभरी इस स्क्वाड्रन को हाल ही में सेवानिवृत हुए एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कमांड किया था। अप्रैल 2022 में आने वाले अगले 16 राफेल जेट को पश्चिम बंगाल के हासिमारा एयरबेस में तैनात किया जाएगा।

गेमचेंजर साबित होगा राफेल

राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ा देगा। यह हवाई क्षेत्र में गेमचेंजर साबित होगा। राफेल पाकिस्तान और चीन से होने वाले हवाई हमलों के खतरे को रोकने और उसे काउंटर करने में काफी मददगार साबित होगा। गौरतलब है कि सॉफ्टवेयर प्रामाणिकता की वजह से सभी 36 जेट्स अक्टूबर 2022 तक ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो पाएंगे।

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