छात्रा को खड़े होकर परीक्षा देने का मामला, शिक्षा विभाग ने लिया कड़ा संज्ञान

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भोपाल: भोपाल में नवीं कक्षा की छात्रा को फीस नहीं भरने के कारण खड़े होकर परीक्षा देने की सजा देने के मामले में कलेक्टर ने एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) धर्मेंद्र शर्मा ने स्कूल प्राचार्य अजय खांडे को फटकार लगाई और मामले की जानकारी ली है। डीईओ ने प्राचार्य से कहा कि आपने मानसिक रूप से छात्रा को प्रताड़ित किया है। छात्रा को तीनों दिन मानसिक रूप से परेशान होकर परीक्षा देनी पड़ी। यदि फीस जमा नहीं थी तो भी किसी बच्चे को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकते, यह अपराध है। डीईओ ने स्कूल प्रबंधन व प्राचार्य के खिलाफ कलेक्टर को जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

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ये है पूरा मामला
दरअसल, स्कूलों में सालाना परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शुक्रवार को शहर के सरस्वती स्कूल में एक नवीं कक्षा की छात्रा को सिर्फ इसलिए खड़े होकर परीक्षा देने की सजा दी गई क्योंकि उसकी फीस का भुगतान समय पर नहीं हो सका।मामले के मीडिया में आते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पीड़ित छात्रा से चर्चा कर इस पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसी सिलसिले में शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) धर्मेंद्र शर्मा टीम के साथ जांच करने स्कूल पहुंचे।

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उन्होंने स्कूल प्राचार्य अजय खांडे को फटकार लगाई और मामले की जानकारी ली। डीईओ को प्राचार्य ने बताया कि छात्रा की फीस अभिभावकों ने जमा नहीं की थी इसलिए परीक्षा से पहले उसे आधा घंटे खड़ा होने के लिए बोला था, लेकिन छात्रा को परीक्षा बैठकर देने दी थी। इस पर डीईओ ने प्राचार्य से कहा कि यदि फीस जमा नहीं थी तो भी आप किसी बच्चे को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकते, यह अपराध है। डीईओ ने स्कूल प्रबंधन व प्राचार्य के खिलाफ कलेक्टर को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इधर, मामले में कलेक्टर ने एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।

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मामले के मीडिया में आते ही सीएम ने दिए थे जांच के आदेश
मामला मीडिया में आने के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पर संज्ञान लिया था उन्होंने स्कूल प्रबंधन की इस हरकत को असंवेदनशील बताया और अधिकारियों को पूरे मामले की जांच के लिए कहा खा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि ‘शासन के सभी अशासकीय शिक्षण संस्थाओं को पूर्व से ही निर्देश है कि किसी भी बच्चे को फीस न भर पाने के कारण ना स्कूल आने से रोका जाये , ना उसे किसी प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी जाये और ना ही उसे परीक्षा से वंचित किया जाये।’

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