इंडस्ट्री मांग: अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए घटाए टैक्स

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस मुलाकात में उद्योग जगत में वित्त मंत्री को भरोसा दिलाया कि वैश्विक सुस्ती के बीच व्यापार के लिहाज से भारत के पास बड़े मौके है। लेकिन इसके लिए जरूरत है कि केंद्र सरकार उद्योग जगत को एक प्रोत्साहन पैकेज दे और टैक्स का बोझ कम करे।

सीआईआई, फिक्की और एसोचैम ने वित्त मंत्री से कहा कारोबारी जंग के बीच भारत अपना कारोबार बढ़ाने के लिए पुख्ता रणनीति तैयार कर सकता है। अगर बैंकों से सस्ता कर्ज मुहैया हो और प्रोत्साहन पैकेज मिले तो इस दिशा मंख भारत उभर कर आ सकता है। जे एस डब्ल्यू स्टील के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने का भरोसा दिया है। जल्द ही स्टील, छोटे कारोबारियों, ऑटो मोबाइल और वित्तीय क्षेत्र को राहत मिलेगी। उन्होंने ये भी कहा कि जैसे ही इन क्षेत्रों में कारोबार पटरी पर लौटने लगेगा नौकरियों भी पैदा होंगी। वहीं सीआईआई के वाइस प्रेसिडेंट टीवी नरेंद्र ने कहा कि सरकार इस्पात उद्योग से जुड़े राहत के कदमों का ऐलान जल्द करेगी। पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता है लेकिन उसका फायदा न तो कारोबारियों को मिल रहा है और न ही निचले स्तर पर ग्राहकों को मिल रहा है।

1. रेपो दर में इस वित्तीय वर्ष में 0.40% की और कमी संभव 

रिजर्व बैंक 6.9 प्रतिशत की विकास दर पाने के लिए वित्तीय वर्ष में ब्याज दर 0.40 फीसदी की और घटा सकता है। बैंकों, रेटिंग एजेंसियों और ब्रोकरेज फर्म ने गुरुवार को यह अनुमान जाहिर किया। एचडीएफसी के अर्थशा्त्रिरयों ने वृद्धि दर में कमी को बहुत कम बताया है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमूरा ने का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस साल के दौरान नीतिगत दरों में 0.40 प्रतिशत की और कटौती करेगा। बोफाएमएल के विश्लेषकों का कहना है कि रिजर्व बैंक इस वित्त वर्ष में रेपो दर में 0.40 की और कमी करेगा और यह पांच प्रतिशत से नीचे आ जाएगी। अक्टूबर में रेपो दर में 0.15 प्रतिशत की और कटौती होगी।

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