मुशर्रफ़ का घर लौटना हुआ मुश्किल ; होईकोर्ट ने ख़ारिज की आतंकवादी आरोप हटाने की याचिका

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इस्लामाबाद. इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व तानाशाह मुशर्रफ की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद पर से आतंकवाद के आरोप हटाने की अपील की थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि मुशर्रफ अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में पाकिस्तान लौटकर सियासत की नई पारी शुरू कर सकते हैं।

हाईकोर्ट के अर्जी खारिज करने के बाद अब अगर मुशर्रफ मुल्क लौटते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। आरोप है कि 2007 में आपातकाल लगाने के बाद मुशर्रफ ने 60 जजों को पांच महीने तक बंधक बनाया था। अदालत ने इसे आतंकवादी कृत्य माना है। 

मुशर्रफ ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में आतंकवाद विरोधी अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उन पर आतंकवाद के आरोप में केस चलाने को मंजूरी दी थी। हाईकोर्ट के जस्टिस अतहर मिन्लाह और मिंगुल हसन ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने यह जानकारी दी है।

मुशर्रफ ने 3 नवंबर 2007 को नवाज सरकार का तख्तापलट करके आपातकाल लागू किया था। इस दौरान 60 जजों को 5 महीने तक उनके घर में नजरबंद रखा गया था। इस्लाबाद हाईकोर्ट ने जजों की याचिका पर 2013 में मुशर्रफ के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों में केस दर्ज करने और मुकदमा चलाने के आदेश दिए थे। 

2013 में कथित तौर पर अमेरिकी दबाव के बाद मुशर्रफ को इलाज के लिए देश छोड़ने की मंजूरी मिली। इसके बाद वो दुबई चले गए। तीन साल बाद भी वो वहीं हैं और ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। उनकी कमाई का कोई ज्ञात जरिया नहीं है। हालांकि, मुशर्रफ का दावा है कि अखबारों में कॉलम और थिंक टैंक्स में लेक्चर के बदले उन्हें मोटी रकम मिलती है। 2009 में भी इस तानाशाह के खिलाफ एक जज को बंधक बनाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।  हाईकोर्ट के ताजा

आदेश के बाद अब इस बात की संभावनाएं बहुत कम हैं कि मुशर्रफ स्वदेश लौटेंगे। क्योंकि, अगर वो ऐसा करते हैं तो उन्हें फौरन गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पाकिस्तानी सेना भी और खासकर सेना प्रमुख मुशर्रफ की वतन वापसी के खिलाफ हैं। मुशर्रफ ने कुछ महीने पहले बाजवा के खिलाफ टिप्पणी की थी। 

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