कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

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कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार पर मचे घमासान के बीच अब विपक्षी पार्टी बीजेपी में भी फूट पड़ती दिख रही है. कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों को बीजेपी में शामिल करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच अंतर्कलह शुरू हो गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी कर्नाटक में सत्ता में वापसी करने के लिए जेडीएस को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दे रही है. बीजेपी के कई बड़े नेता कर्नाटक बीजेपी में जेडीएस और कांग्रेस के बागी विधायकों को शामिल करने को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.

खबर है कि बीजेपी के महासचिव मुरलीधर राव ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के करीबी और पर्यटन मंत्री आर महेश से इस मुद्दे पर बातचीत भी की है. इस संबंध में जब मुरलीधर राव से सवाल किए गए तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्होंने आर महेश से मुलाकात तक नहीं की है.

उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर दो नेताओं का होना मात्र एक संयोग है और कुछ नहीं. उन्होंने कहा कि आप सभी किसी भी तरह की अफवाहों पर यकीन न करें. हालांकि उन्होंने इस मौके पर भी कांग्रेस और जेडीएस पर हमला बोला और यहां तक कह दिया कि कांग्रेस-जेडीएस का कुशासन तेजी से खत्म हो रहा है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक बीजेपी कर्नाटक में बदले समीकरण पर लगातार नजर बनाए हुए है और कर्नाटक की जनता के हितों की रक्षा के लिए वह कुछ भी करने को तैयार है.

गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके चलते राज्य की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार अल्पमत में आती दिखाई दे रही है. हालांकि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने अभी तक कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए हैं.

कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने कहा है कि उनसे मुलाकात करने वाले विधायकों ने सही फॉर्मेट में अपने इस्तीफे दे दिए हैं. वह इस बात की जांच करेंगे कि ये ‘इस्तीफे स्वैच्छिक हैं और प्रामाणिक हैं या नहीं.’ कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के विधायकों से मुलाकात के बाद एक प्रेस वार्ता में रमेश कुमार ने कहा कि, ‘विधायक आए थे, उन्होंने कहा कि वे इस्तीफा देना चाहते हैं, मैंने कहा कि वे दे सकते हैं … उन्होंने मुझे इसे स्वीकार करने के लिए कहा. ऐसा नहीं हो सकता कि मुझे यह देखना होगा कि यह वास्तविक या स्वैच्छिक है या नहीं.’नियमों का पालन करने की बात कहते हुए स्पीकर ने कहा कि वह वह सिर्फ निर्णय लेंगे जो कुछ के लिए सुविधा हो सकती है और कुछ के लिए असुविधा.’ इस बीच, सूत्रों ने कहा कि विधायक मुंबई लौट रहे थे.

क्या होगा अगर मंजूर होगा इस्तीफा
अगर 16 विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया जाता है तो असेंबली की सदस्य संख्या 208 रह जाएगी. बहुमत का आंकड़ा 105 का हो जाएगा और सरकार के पास 100 की सदस्य संख्या ही होगी. बीजेपी के 105 विधायक हैं दो निर्दलीयों को मिला दें तो आंकड़ा 107 का हो जाता है. कांग्रेस-जेडीएस की सरकार अपने बागी विधायकों को सबक सिखाना चाहती है. इस्तीफा स्वीकार नहीं किए जाने की स्थिति में सदस्य संख्या 224 ही रहेगी. इस स्थिति में अगर विश्वास मत या अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाता है तो कांग्रेस और जेडीएस अपने विधायको को व्हीप जारी कर सकती है. विधायकों पर एक तरह से दवाब होगा. अगर बागी विधायक सरकार के खिलाफ जाते हैं तो एंटी-डिफेक्शन लॉ के तहत उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है. तमिलनाडु में इसी तरह से 2017 में विधायकों की सदस्यता गई थी.

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