कर्नाटक राजनीतिक संकट अपडेट्स: जानें क्या है ‘परमेश्वर फैक्टर’, कांग्रेस के चार विधायकों पर टिकी नजर

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कर्नाटक में एक बार फिर सियासी संकट उठ खड़ा हुआ है। कांग्रेस के 13 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद संकट गहरा गया है। ये बात अलग है कि कांग्रेस और जेडीएस दोनों दलों का कहना है कि सरकार पर किसी तरह का खतरा नहीं है। इन सबके बीच बीजेपी का कहना है कि वो राज्य की राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर है। लेकिन वो सरकार बनाने की जल्दी में नहीं है।ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि राज्य में सरकार बनाने की गणित किसके पक्ष में है। 

कर्नाटक के राजनीतिक संकट पर कांग्रेस और जेडीएस का कहना है कि बीजेपी अपनी कुटिल चाल के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। सिद्धारमैया का कहना है कि सरकार की पर किसी तरह की संकट नहीं है। गठबंधन की सरकार पूरे पांच साल तक बिना किसी बाधा के चलती रहेगी। लेकिन बीजेपी का कहना है कि सिद्धारमैया अपनी सरकार के लिए खुद ब खुद संकट बने हुए हैं। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए कांग्रेस और जेडीएस की तरफ से बीजेपी पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। 


कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा का कहना है कि उन्होंने कांग्रेस से जुड़े सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया है जिसमें मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर बातचीत की जाएगी। हम जानते हैं कि बीजेपी की तरफ से सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। अगर जरूरत होगी तो हम सभी इस्तीफा देकर उन लोगों को सरकार में लाने की कोशिश करेंगे जो नाराज बताए जा रहे हैं। 

इससे पहले कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर एच डी कुमारस्वामी और कांग्रेस के बागी विधायक रामलिंगा रेड्डी के बीच बेंगलुरु में अज्ञात जगह पर बातचीत हुई। अभी यह नहीं पता चला है कि बातचीत किन बिंदुओं पर की गई। लेकिन राजनीतिक बातचीत से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के चार बागी विधायकों एस टी सोमशेखर, बी बासवराजू, एन मुनिरत्ना और रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा से खफा है। इन विधायकों को जी परमेश्वरा की कार्यप्रणाली से नाराजगी है जिसे सुलझाया जा सकता है। बता दें कि रामलिंगा रेड्डी से सीएम कुमारस्वामी ने मुलाकात की थी। जी परमेश्वरा ने कहा कि अगर बागी कांग्रेस विधायकों को उनसे परेशानी है तो वो विवाद सुलझाने के लिए तैयार हैं। 

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