सावधान! पान मसाला में मिला ये जहरीला पदार्थ, कई बड़े ब्रांड हैं शामिल

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बिहार में पान मसाला कारोबारियों पर अब सरकार की नजर और टेड़ी होती जा रही है. जहां पिछले माह मान मसाला का कारोबार करने वाली 15 कंपनियों के पान मसालों की जांच में मैग्नीशियम कार्बोनेट पाया गया था. जिसके बाद उन्हें आगे की जांच के लिए भी भेजा गया था. इसकी रिपोर्ट रविवार को आ गयी है. रिपोर्ट में सामने आई बातें चौंकाने वाली हैं. इन 15 में से 7 कंपनियों के पान मसालों के नमूनों में जहरीला रासायनिक पदार्थ निकोटिन पाया गया है. जानकारी के अनुसार राजनीगंधा सहित 7 अन्य कंपनियों के पान मसाला में निकोटिन पाया गया है. बता दें कि फू़ड सेफ्टी एक्ट 2011 के रेगुलेशन 2.3.4 के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ में निकोटिन की मिलावट प्रतिबंधित है. इन सबमें खास बात यह है कि ये कंपनियां अपने पैकेट्स और विज्ञापनों में 0% निकोटिन और 0% तंबाकू लिखकर ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं.

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त संजय कुमार ने पान मसाला के विभिन्न ब्रांड में मैग्नीशियम कार्बोनेट पाए जाने के बाद लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 15 ब्रांडों के पान मसालों की बिक्री, उत्पादन, भण्डारण एवं परिवहन पर 30 अगस्त 2019 को बैन कर दिया था. साथ ही सभी 15 ब्रांड के नमूनों को आगे की जांच के लिए भारत सरकार के नेशनल टोबैको टेस्टिंग लेबोरेटरी में भेजा था.

जानकारी के अनुसार भारत सरकार के लेबोरेटरी जांच रिपोर्ट में रजनीगंधा सहित 7 पान मसाला ब्रांडों के नमूनों में जहरीला रासायनिक पदार्थ (निकोटिन) पाया गया है. फ़ूड सेफ्टी एक्ट 2011 के रेगुलेशन 2.3.4 के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ में निकोटिन या तंबाकू की मिलावट प्रतिबंधित है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना भी है. सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के अप्रैल माह में अंकुर गुटखा के एक मामले में आदेश जारी करते हुए निकोटिन युक्त पान मसाला और गुटखा को प्रतिबंध किया था. साथ ही सभी राज्य सरकारों को सख्ती से इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया था.

निकोटिन क्या है?

निकोटीन एक जहरीला पदार्थ है, साथ ही यह नशे को बढ़ावा देता है. निकोटिन तंबाकू के पौधे में पाए जाने वाला एक अत्यधिक नशे की लत लगाने वाला रासायनिक पदार्थ है. निकोटिन नशे की अत्यधिक लत के अलावा गंभीर साइड इफ़ेक्ट के लिए भी जाना जाता है. यह ह्रदय, प्रजनन प्रणाली, फेफड़े, गुर्दे अदि पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. कई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक यह कैंसर जैसे घातक रोग पैदा करने की भी पुष्टि करता है. निकोटिन का एकमात्र ज्ञात उपयोग 17 वीं शताब्दी से कीटनाशक के रूप में किया जाता रहा है. निकोटीन कार्बन मोनो ऑक्साइड रक्त में लेकर जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता हैं. यह सांस लेने में तकलीफ़ का कारण बनता है.

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