महाशिवरात्रि में रुद्राभिषेक के लिए जरूर रख लें ये चीजें

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 भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को पूरे देश-भर में मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। हर कोई भगवान भोलेनाथ के पूजन और रुद्राभिषेक की तैयारी कर रहा है। वैसे तो शिव को भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वह सिर्फ एक लोटे जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी हर शिव भक्त वह हर वस्तु उन्हें चढ़ाता है, जो भोलेनाथ को पसंद हो। रुद्राभिषेक के लिए इन चीजों का होना बहुत जरूरी है।

गंगा जल : भगवान शिव की पूजा में गंगा जल का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गंगा भगवान व‌िष्‍णु के चरणों से न‌िकली और भगवान श‌िव की जटा से धरती पर अवतरित हुई हैं। यही वजह है कि अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा जी को सबसे पावन माना जाता है। मान्यता है कि गंगा जल से भगवान श‌िव का अभ‌िषेक करने से मन में शान्ति मिलती है। वहीं, शिव पुराण के अनुसार, शिव पर जल चढ़ाने का महत्व भी समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है। हलाहल विष पीने के बाद शिव का कंठ एकदम नीला पड़ गया था। विष की ऊष्णता को शांत करके शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए समस्त देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिव पूजा में जल का विशेष महत्व है।

बिल्वपत्र : भगवान के तीन नेत्रों का प्रतीक है बिल्वपत्र। अत: तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय है। प्रभु आशुतोष के पूजन अभिषेक में बिल्वपत्र या बेल पत्र का प्रयोग किया जाता है। ऋषियों ने कहा है कि बिल्वपत्र भोले-भंडारी को चढ़ाने से 1 करोड़ कन्यादान के बराबर फल मिलता है। वहीं, शास्त्रों में कहा गया है कि शिव पूजन में एक आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के बराबर फल देता है।

धतूरा : भगवान शिव को धतूरा भी अत्यंत प्रिय है। इसके पीछे पुराणों मे जहां धार्मिक कारण बताया गया है, वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक दृष्टि से धतूरा सीमित मात्रा में लेने पर औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है। देवी भागवत‍ पुराण के अनुसार, जब शिवजी ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को पिया, तो वह व्याकुल होने लगे। तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता दूर की। उस समय से ही शिव जी को भांग, धतूरा प्रिय है।

भांग : शिव हमेशा ध्यानमग्न रहते हैं। भांग ध्यान केंद्रित करने में मददगार होती है। इससे वे हमेशा परमानंद में रहते हैं। भगवान को औषधि स्वरूप भांग चढ़ाई जाती है।

कपूर : भगवान शिव का प्रिय मंत्र है कर्पूरगौरं करूणावतारं…. यानी जो कपूर के समान उज्जवल हैं। कर्पूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाती है। भगवान भोलेनाथ को इस महक से प्यार है अत: कर्पूर शिव पूजन में अनिवार्य है।

चंदन : चंदन का भी संबंध शीतलता से है। भगवान शिव मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड लगाते हैं। चंदन का प्रयोग अक्सर हवन में किया जाता है और इसकी खुशबू से वातावरण महक उठता है।

इन चीजों की भी कर लें व्यवस्था

इसके अलावा पूजन में प्रयोग के लिए रोली, मोली, साबुत चावल, धूप दीप, मिश्री, कमलगट्टा, साबुत हल्दी, पांच प्रकार के फल, सफेद मिष्ठान, सफेद चंदन, नागकेसर, केसर, मिश्री, लाल और पीले गुलाब के फूल, आक के फूल, रंग बिरंगे अबीर गुलाल, गुलाब और चंदन का इत्र, गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, जनेऊ, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, वस्त्राभूषण, रत्न, दक्षिणा आदि भी पहले से खरीद लें।

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