राज्यसभा में मोदी सरकार की दूसरी बड़ी सफलता, RTI के बाद तीन तलाक बिल पर विपक्ष का मिला ‘साथ’

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नरेंद्र मोदी सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में मुस्लिम महिला विवाह संरक्षण अधिकार विधेयक 2019 (तीन तलाक विधेयक) पारित कर इतिहास रच दिया। सरकार के पास लोकसभा में तो संख्याबल था लेकिन राज्यसभा में विधेयक पारित कराने के लिए उसे विपक्ष के सहयोग की जरूरत पड़ती थी। विपक्ष के विरोध के चलते कई अहम विधेयक उच्च सदन में अटके पड़े हैं। तीन तलाक विधेयक भी उसमें अहम था लेकिन मोदी सरकार ने अपने कुशल राजनीतिक प्रबंधन के दम पर विपक्षी एकता में सेंध लगाते हुए इस विधेयक को पारित करा लिया। अब यह विधेयक हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इस विधेयक की अधिसूचना जारी होते ही यह कानून की शक्ल ले लेगा। 

तीन तलाक विधेयक के लोकसभा में पारित होने पर कोई संशय नहीं था क्योंकि यहां सरकार के पास बहुमत है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गत गुरुवार को तीन तलाक विधेयक को लोकसभा में पेश किया था। निम्न सदन में विपक्ष के विरोध के बावजूद चर्चा के बाद यह विधेयक वहां आसानी से पारित हो गया। रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जिस पर लंबी बहस हुई। कांग्रेस सहित विपक्षी दल ने इस विधेयक को चयन समिति के पास भेजने और इसकी जगह दूसरा विकल्प पेश करने के लिए सरकार को सुझाव दिया लेकिन सरकार ने विपक्ष के सुझावों को अनसुना कर दिया। 

विपक्ष की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही तत्काल तीन तलाक को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर चुका है, ऐसे में कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है। जबकि सरकार ने कानून बनाने के पीछे तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से तत्काल तीन तलाक के मामले सामने आए हैं। ऐसे में आपराधिक प्रावधान वाले कानून की जरूरत है। सरकार का कहना है कि यह कानून तीन तलाक की दिशा में आगे बढ़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को हतोत्साहित करने के साथ ही मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षा एवं उन्हें न्याय देगा।

बहरहाल, सरकार तीन तलाक विधेयक को राज्यसभा में पारित करा बड़ी जीत हासिल की है। राज्यसभा में विपक्ष का रवैया देखकर इस बात की आशंका था कि इस विधेयक का अंजाम पहले की तरह होने वाला है यानि कि विपक्ष के विरोध के चलते यह विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो पाएगा लेकिन मोदी सरकार के कुशल राजनीतिक प्रबंधन और उसके दांव ने विपक्ष को चित कर दिया। मोदी सरकार की चतुराई से विपक्षी एकता छिन्न-भिन्न हो गई और यह विधेयक पारित हो गया। विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार एक सप्ताह के भीतर राज्यसभा में अपना दूसरा महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल हुई है। इसके पहले वह सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक उच्च सदन से पारित कराने में कामयाब हुई है।

दरअसल, मंगलवार को तीन तलाक विधेयक पर चर्चा के बाद विपक्ष ने विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव दिया लेकिन उसके सभी प्रस्ताव गिर गए। इसके बाद विधयेक पर मतविभाजन हुआ। इस मतविभाजन के दौरान विपक्ष ने सदन से गैर-हाजिर होकर और वॉक आउट कर सरकार का परोक्ष रूप से मदद की। मतविभाजन के दौरान विपक्षी दलों के करीब 23 सांसद सदन में उपस्थित नहीं थे। मतविभाजन के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने वालों में कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 6, बहुजन समाज पार्टी के चार, राकांपा के 2, टीडीपी के 2, पीडीपी के 2, डीएमके का 1, सीपीएम का 1 और टीएमसी का एक सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा जद-यू, एआईएडीएमके और टीआरएस के साथ कुल 23 सदस्य सदन से अनुपस्थित रहे। विपक्ष ने इस विधेयक को चयन समिति के पास भेजने की मांग की लेकिन उसका यह प्रस्ताव गिर गया। इस विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े।

राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 245 है लेकिन पांच सीटें रिक्त होने के चलते यह संख्या अभी 240 है। मंगलवार को तीन तलाक विधेयक पर 184 सदस्यों ने मतदान किया। इस तरह कुल 56 सदस्य अनुपस्थित रहे। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए अपने फ्लोर मैनेजर्स को सक्रिय कर दिया था। मोदी सरकार अपने चुनावी वादे को हर हाल में पूरा करना चाहती थी। सरकार के फ्लोर मैनेजर्स एआईएडीएमके, टीआरएस और जद-यू के साथ संपर्क में थे और उन्हें अपने मिशन में सफलता मिली और सरकार की सक्रियता से विपक्ष के 23 सदस्य सदन से अनुपस्थित हो गए। दिलचस्प बात है कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर मतविभाजन के समय राकांपा सुप्रीमो शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल सदन से अनुपस्थित रहे। 

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