निर्भया केस में दोषी पवन के नाबालिग होने का दावा सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, कल होनी है फांसी

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के दोषी पवन गुप्ता की उस सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पीटिशन) को गुरुवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 2012 में हुए इस अपराध के समय नाबालिग होने का दावा किया था। न्यायमूर्ति एन.वी. रमण के नेतृत्व में छह न्यायाधीशों की एक पीठ ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह कोई मामला नहीं बनता। गौरतलब है कि पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को फांसी देने के लिए नया मृत्यु वारंट जारी किया था। चारों दोषियों को 20 मार्च सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दी जाएगी। सभी दोषी अपने सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल कर चुके है और उनके बचने के लगभग सभी रास्ते बंद हो चुके हैं।

पीठ ने कहा, ” मौखिक सुनवाई का अनुरोध खारिज किया जाता है। हमने सुधारात्मक याचिका और संबंधित दस्तावेजों पर गौर किया। हमारे अनुसार यह कोई मामला नहीं बनता… इसलिए हम सुधारात्मक याचिका को खारिज करते हैं। पीठ में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर. एस. बोपन्ना भी शामिल थे।

पवन ने तिहाड़ में की फांसी देने का अभ्यास

दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया मामले के चार दोषियों को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद ने बुधवार को पुतलों को फांसी देकर अभ्यास किया। दोषियों को जेल में शुक्रवार को फांसी दी जानी है। उधर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दोषी की एक और याचिका को खारिज कर दिया है। जेल अधिकारियों ने बताया कि पवन मंगलवार को मेरठ से राजधानी पहुंचे और उन्होंने रस्सी से पुतलों को फांसी देकर अभ्यास किया। इस रस्सी का इस्तेमाल दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए होगा। तिहाड़ जेल के इतिहास में यह पहली बार होगा जब एक ही अपराध के लिए एक ही समय पर चार दोषियों को फांसी दी जाएगी।

पवन अपने परिवार में तीसरे पीढ़ी के जल्लाद हैं। उन्होंने पहले कहा था कि उनके दादा ने सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी पर लटकाया था। इन दोनों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के संबंध में फांसी दी गई थी। इसके अलावा उनके दादा ने कुख्यात अपराधी रंगा और बिल्ला को भी फांसी दी थी। 

अदालत ने मृत्यु वारेंट को तीन बार इस आधार पर टाल दिया गया था कि दोषियों के सभी कानूनी उपचार समाप्त नहीं हुए हैं और एक या अन्य दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। दिल्ली में 23 साल की छात्रा के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात को एक चलती बस में बर्बरता के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। इस घटना के करीब 15 दिन बाद पीड़िता की सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। इस घटना ने देश को हिला दिया था। पीड़िता को को निर्भया नाम से जाना गया।

इस मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें एक नाबालिग शामिल था। वहीं छठे व्यक्ति राम सिंह ने मामले में सुनवाई शुरू होने के कुछ समय बाद खुदकुशी कर ली थी। वहीं नाबालिग को 2015 में रिहा कर दिया गया था। उसने सुधार गृह में तीन साल का समय बिताया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मुकेश की एक याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में उसने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके इस दावे को नहीं माना गया था कि 16 दिसंबर 2012 को जब जुर्म हुआ तब वह दिल्ली में नहीं था।

न्यायमूर्ति ब्रृजेश सेठी ने कहा कि निचली अदालत के विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि यह बताने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि इस मामले में मुकदमा किसी भी साक्ष्य को छिपाने के कारण प्रभावित हुआ। हाईकोर्ट ने मुकेश सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा, “ निचली अदालत की ओर से पारित किए गए आदेश में कोई अवैधता या अनियमितता नहीं है।” इस बीच मामले के चार में से तीन दोषियों ने अपनी मृत्युदंड पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि उनमें से दो की दूसरी दया याचिका अब भी लंबित है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने इस याचिका पर तिहाड़ जेल प्राधिकारियों और पुलिस को नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस पर गुरुवार को सुनवाई करेंगे। न्यायाधीश ने तीन दोषियों की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ए पी सिंह से पूछा कि उन्होंने कार्यदिवस के अंत में याचिका क्यों दायर की जबकि वह जानते हैं कि फांसी में सिर्फ एक दिन का वक्त बचा है।इस पर सिंह ने कहा कि वह कार्य में व्यस्त थे क्योंकि दोषियों द्वारा दायर कई याचिकाएं अलग अलग अदालतों में लंबित हैं।अक्षय, विनय और पवन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि अक्षय और पवन द्वारा दायर समीक्षा दया याचिकाएं राष्ट्रपति के समक्ष लंबित हैं।

याचिका में कहा गया कि सजा पर रोक चौथे दोषी मुकेश पर भी लागू होगी क्योंकि उसे अलग से फांसी नहीं दी जा सकती।याचिका में यह भी कहा गया कि अक्षय की पत्नी द्वारा दायर तलाक संबंधी याचिका बिहार की एक स्थानीय अदालत में लंबित है। याचिका में कहा गया कि याचिकाओं पर विचार के लिये समय चाहिए और इसलिये फांसी की मौजूदा तारीख 20 मार्च बरकरार नहीं रखी जा सकती, इसलिये इसे दरकिनार किया जाना चाहिए।

जानिए निर्भया के गुनहगारों को
1- राम सिंह-मुख्य आरोपी। गैंगरेप के बाद निर्भया को लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा था। मार्च 2013 में खुदखुशी कर ली। 
2- मुकेश सिंह- बस का क्लीनर व राम सिंह का भाई। रेप के बाद इसने भी निर्भया और उसके  दोस्त को बुरी तरह पीटा था।
3- विनय शर्मा- मुकेश का दोस्त। रेप के समय बस चला रहा था।
4- पवन गुप्ता- घटना के समय बस में मौजूद था।
5- अक्षय ठाकुर- राम सिंह का दोस्त। मूलत: बिहार से।
6- नाबालिग दोषी- उत्तर प्रदेश के बदायूं का निवासी। निर्भया को बस में चढ़ने का आग्रह करने वाला। तीन साल की कैद पूरी करने के बाद 2015 में रिहा। 

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