दिल्‍ली हाई कोर्ट के फैसले से दुखी ऋषि कपूर बोले-तारीख पे तारीख

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दिल्‍ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक बार फिर से निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी को टाल दिया। दिल्‍ली हाई कोर्ट के फैसले से बॉलीवुड एक्‍टर ऋषि कपूर खासे दुखी और नाराज हैं। फैसले के बाद ऋषि कपूर ने अपनी ही एक फिल्‍म का एक डायलॉग ट्वीट किया है। गौरतलब है कि दिल्‍ली हाई कोर्ट ने साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के दोषियों के लिए जारी डेथ वॉरंट को टाल दिया। इस घटना के एक दोषी की दया याचिका अभी तक अटकी हुई है।

फांसी में बचे थे बस 13 घंटे

ऋषि कपूर ने ट्वीट किया और लिखा, ‘निर्भया केस। तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख-दामिनी। बहुत ही मूर्खतापूर्ण।’ सोमवार को दिल्‍ली हाई कोर्ट के जज धर्मेंद्र राणा ने दोषियों की फांसी पर उस समय रोक लगा दी जब बस 13 घंटे बचे थे। मंगलवार को सुबह छह बजे चारों दोषियों को फांसी दी जानी थी। जज ने अपने फैसले में कहा कि दोषी पवन गुप्‍ता की दया याचिका अभी तक राष्‍ट्रपति के पास अटकी पड़ी है। इन चारों को तिहाड़ जेल में फांसी दी जाने वाली थी। निर्भया के चारों दोषियों की फांसी के लिए पहले 22 जनवरी की तारीख तय हुई थी। इसके बार फिर एक फरवरी और फिर तीन मार्च को फांसी की तारीख तय की गई।

दामिनी का है डायलॉग

ऋषि कपूर ने अपनी जिस फिल्‍म ‘दामिनी’ के डायलॉग का जिक्र किया वह साल 1993 में रिलीज हुई थी। मिनाक्षी शेषाद्री, अमरीश पुरी और सनी देओल भी फिल्‍म में लीड रोल में नजर आए थे। फिल्‍म की कहानी भी एक गैंगरेप पीड़‍िता और उसे इंसाफ दिलाने के लिए दामिनी के संघर्ष के के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्‍म में अमरीश पुरी ऐसे वकील के तौर पर थे जो दोषियों को बचाने की कोशिश में नजर आते हैं। राजकुमार संतोषी की इस फिल्म में सनी देओल पीड़‍िता के वकील के तौर पर थे।

क्‍लाइमेक्‍स का सीन आज भी यादगार

फिल्‍म का वह सीन आज भी एक यादगार सीन है जो क्‍लाइमेक्‍स में आता है। कोर्टरूम के इस सीन में जब जज कोर्ट की कार्यवाही को स्‍थगित करने वाले होते हैं तभी वकील के तौर सनी देओल ‘तारीख पे तारीख’ के साथ उन पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। यह डायलॉग आज भी एक यादगार डायलॉग माना जाता है। 16 दिसंबर 2012 को छह लोगों ने पैरामेडिक स्‍टूडेंट के साथ निर्ममतापूर्वक बलात्‍कार किया था। चलती बस में हुई इस घटना में छठां दोषी नाबालिग था। 31 दिसंबर 2012 को पीड़‍िता ने इलाज के बाद भी दम तोड़ दिया था। तिहाड़ जेल में एक दोषी ने आत्‍महत्‍या कर ली थी जबकि नाबालिक को तीन साल तक सुधार गृह में रखकर रिहा कर दिया गया था।

मां बोली-फांसी के फंदे तक पहुंचाऊंगी सबको

सोमवार को निर्भया की मां आशा देवी ने दिल्‍ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद कहा यह सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है। आज लोगों के बीच संदेश जा रहा है कि हमारे देश में इंसाफ से ज्यादा मुजरिमों को सपोर्ट दिया जाता है। इससे साफ होता है कि हमारा सिस्टम भी दोषियों के बचाव के लिए है। उन्होंने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट, पटियाला कोर्ट और सरकार से पूछना चाहिए कि सभी दोषियों को फांसी कब तक होगी. मैं हर रोज हारती हूं और फिर से खड़ी हो जाती हूं। आज एक बार फिर से हारी हूं। लेकिन हार मानने के लिए तैयार नहीं हूं। फिर से खड़ी हुई हूं और सबको फांसी के फंदे तक पहुंचाऊंगी।

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