Chandrayaan 2: नहीं टूटी उम्मीद, अब ‘ऑर्बिटर’ के कंधे पर जिम्मेदारी

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चंद्रयान-2 का चांद पर उतरने से ठीक पहले संपर्क टूट गया। लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान सबकी सांसे अटक गई थी। अंतिम क्षणों में विक्रम से ISRO का संपर्क टूट गया है। ISRO की ओर से घोषणा की गई कि विक्रम का संपर्क टूट गया है। विक्रम और प्रज्ञान कहीं खो गए हैं।

बता दें कि चंद्रयान-2 के तीन हिस्से थे – ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान। फिलहाल लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है लेकिन ऑर्बिटर की उम्मीदें अभी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सिंतबर को ऑर्बिटर से अलग किया गया था। ऑर्बिटर इस समय चांद से करीब 100 किलोमीटर ऊंची कक्षा में चक्कर लगा रहा है।

2379 किलोग्राम वजन वाला ऑर्बिटर यहां कई अहम जिम्मेदारियों को अंजाम देगा। ऑर्बिटर बेंगलुरु में स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आइएसडीएन) से संपर्क में रहेगा। इस पर लगे हुए पेलोड निम्नलिखित काम करेंगे।

चांद का एक्सरे
चंद्रयान-2 पर लगा लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर यहां सतह पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश के आधार पर यहां मौजूद मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम, सिलिकॉन आदि का पता लगाएगा।

3डी मैप बनेगा
यान पर लगा लगा पेलोड टेरेन मैपिंग कैमरा हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों की मदद से चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा। इससे चांद के अस्तित्व में आने से लेकर इसके विकासक्रम को समझने में मदद मिलेगी।

पानी व अन्य खनिजों के जुटाएगा प्रमाण
इमेजिंग आइआरएस स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से यहां की सतह पर पानी और अन्य खनिजों की उपस्थिति के आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी।

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