ऑफ द रिकार्ड: अशुभ ‘होलाष्टक’ ने पी.एम. मोदी को करवाया चुप

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश भर में लगातार चुनाव प्रचार करते रहते हैं। उन्होंने 8 फरवरी और 10 मार्च के बीच 157 परियोजनाओं का उद्घाटन किया और अब अचानक ही वह चुप हो गए हैं। लगभग एक सप्ताह तक मोदी ने टी.वी. या रेडियो पर एक शब्द भी नहीं बोला। एक बार उन्होंने ट्वीट किया था। वह अत्यधिक खामोशी बनाए हुए हैं।
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यद्यपि 11 मार्च से चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है और इसने सरकार को ताजा अध्यादेश जारी करने और अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी है। प्रधानमंत्री जो वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग के जरिए समारोहों को सम्बोधित किया करते थे अब वह एक सप्ताह से ऐसा नहीं कर रहे।
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सूत्रों ने कहा कि मोदी के चुप्पी धारण करने के कारणों में से एक कारण ‘होलाष्टक’ की शुरूआत है। होलाष्टक को अशुभ माना जाता है और होली से पूर्व की अवधि को अभिशाप का समय बताया जाता है। होली समारोह 21 मार्च को है इसलिए मोदी के किसी बड़े सार्वजनिक समारोह को सम्बोधित करने की सम्भावना नहीं।
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बताया जाता है कि प्रधानमंत्री इस समय राजनीतिक कामकाज में बहुत व्यस्त हैं और वह अमित शाह, अरुण जेतली तथा संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्यों सहित वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों के साथ करीबी तालमेल में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए रिपोर्टों की समीक्षा कर रहे हैं। चुनावी अभियान अखाड़े में कूदने से पूर्व प्रधानमंत्री क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन को अंतिम रूप देने की हर बात को पूरा करना चाहते हैं। खबरों के अनुसार भाजपा ने 36 पार्टियों के साथ गठबंधन पूरा कर लिया है।
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अब 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणा पत्र पर काम किया जा रहा है और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ चर्चा जारी है। मोदी पूर्णतावादी हैं और छोटी से छोटी बात को समझते हैं। वह इस संबंध में कुछ अधिक समय दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने 7 लोकनायक मार्ग निवास स्थान पर वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ बातचीत करने में जुटे हुए हैं और पहले चरण के लिए उम्मीदवारों के नामों को मंजूरी देने के लिए संसदीय बोर्ड की बैठकों में भी शामिल हो रहे हैं।

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