आप-कांग्रेस गठबंधन को लेकर अब राहुल गांधी का इंतजार

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दिल्ली की सात सीटों पर होने वाले चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर एक ओर जहां उम्मीदें काफी बढ़ गई है, वहीं कई संसदीय क्षेत्रों में अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर भी खींचतान शुरू होती दिख रही है। वैसे गठबंधन को लेकर शीला दीक्षित के तेवर कुछ नरम दिखने शुरू हो गए हैं। अब इस बारे में राहुल गांधी के दिल्ली लौटने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो अगले दो-तीन दिनों में सब कुछ साफ हो जाएगा।
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इसमें दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी से गठबंधन को लेकर शीला दीक्षित अपनी राय पार्टी हाईकमान को पहले ही व्यक्त कर चुकी हैं लेकिन दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको द्वारा शक्ति ऐप के माध्यम से कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कराई गई। उसके बाद ही चाको ने कहा है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए भाजपा को हराने के लिए समय की यही मांग है कि गठबंधन होना चाहिए। बेशक गठबंधन के बारे में शीला दीक्षित कल तक कुछ भी कहती रहीं हो, लेकिन अब उनकी सोच में भी कुछ नरमी दिखाई देने लगी है। उन्होंने कहा है कि जो कहना था कह दिया, लेकिन पार्टी हाईकमान को जो भी फैसला होगा, वह मान्य होगा।

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यह बात दीगर है कि प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश सक्रिय व सामान्य कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में नही हैं। हालांकि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन होने की संभावनाओं को लेकर शुरू से ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। लेकिन सच्चाई यह है कि उस समय भी सीटों के बटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच खींचतान होने की बात सुनने को मिली थीं और आज तक इसी बात को लेकर पेंच अटका हुआ है। कारण यह है कि आम आदमी पार्टी ने पहले ही दिल्ली के छह संसदीय क्षेत्रों में अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर मैदान मार लिया था।
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अब कांग्रेस उनमें से तीन सीटों पर हरसंभव अपने प्रत्याशियों को खड़ा करने की बात कर रही है। कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन होने की सूरत में वह अपने पुराने वोट बैंक रहे पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण दिल्ली की सीट पर अपने उम्मीदवार खड़ा करे। नई दिल्ली सीट से अजय माकन पहले से ही जुटे हुए हैं जबकि आप के तीन वरिष्ठ नेता आतिशी, दिलीप पांडे और राघव चड्डा पिछले काफी दिनों से वहां पहले से ही चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। इन तीनों को आप अपना मजबूत उम्मीदवार मानती है जबकि पश्चिमी दिल्ली में दोनों दलों की ओर से संयुक्त उम्मीदवार उतारने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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