ICC World Cup : क्या विजय शंकर की चोट भारत के लिए ‘वरदान’ साबित होगी?

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विजय शंकर चोटिल हैं, जिस कारण से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया है. हालांकि चोट उस समय लगी जब भारत सेमीफाइनल के दरवाजे पर खड़ा है। लीग में सिर्फ दो मैच बाकी हैं. भारत सात मैच खेल चुका है. एक में हार और एक बारिश से धुलने के अलावा बाकी मैच टीम इंडिया ने जीते हैं लेकिन विजय शंकर वैसा असर नहीं छोड़ पाए हैं, जैसी उम्मीद का जा रही थी. ऐसे में सवाल यही है कि उनकी चोट टीम इंडिया को नुकसान पहुंचाएगी या यह वरदान की तरह है, जिसे अंग्रेजी में ‘ब्लेसिंग इन डिसगाइज’ कहते हैं. किसी भी खिलाड़ी के लिए ऐसा कहना अच्छा नहीं है, लेकिन ऐसी बातें हो रही हैं, तो उनकी अपनी वजह हैं.

नंबर चार पर कमजोर खेल

पहली वजह है नंबर चार का प्रदर्शन. विजय शंकर अब तक नंबर चार पर वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, जिसकी उम्मीद थी. उन्होंने तीन मैच में 58 रन बनाए हैं. 29 बेस्ट स्कोर है, यही औसत भी है. लेकिन औसत बेहतर दिखने की एक वजह यह भी है कि एक मैच में वह नॉट आउट थे.

औसत और रन देखने के बाद एक सबसे अहम पॉइंट पर जिक्र जरूरी है. विजय शंकर का स्ट्राइक रेट 77.33 है. जो लोग महेंद्र सिंह धोनी की धीमी बल्लेबाजी से नाखुश हैं, वे जान लें कि धोनी का स्ट्राइक रेट 91 से ज्यादा है. नंबर चार का बल्लेबाज अगर 80 से भी नीचे की स्ट्राइक रेट से रन बनाए, तो समस्या होगी ही.

गेंदबाजी में ज्यादा मौके नहीं

विजय शंकर को टीम में लिया गया था तो उन्हें थ्री डी प्लेयर बताया गया था. इसे लेकर अंबाति रायडू ने मजाक भी उड़ाया था. रायडू की जगह पर ही विजय शंकर टीम में आए थे. जिन तीन मैचों में वो खेले हैं, उनमें कुल मिलाकर 5.2 ओवर ही गेंदबाजी की है. यानी उनकी गेंदबाजी की जरूरत टीम को पड़ी ही नहीं. शायद यही वजह है कि अब बीसीसीआई ने विशेषज्ञ बल्लेबाज मयंक अग्रवाल को टीम में शामिल करने का फैसला किया है, जो ओपनर हैं.

दो मुद्दों पर जिक्र हो गया, जिनमें विजय शंकर का प्रदर्शन बहुत कमाल का नहीं रहा. या यूं कहें कि कमजोर रहा. एक मुद्दा है, जिसमें उनकी चोट टीम इंडिया के लिए परेशानी खड़ी करने वाली कही जा सकती है. मुद्दा टाइमिंग का है. विजय शंकर 1 जुलाई को टीम से बाहर हो रहे हैं. 2 जुलाई को भारत अपना आठवां मैच खेलेगा, जिसके बाद सिर्फ एक लीग मैच बचता है. वह मैच भी 6 जुलाई यानी शनिवार को है. अभी तक की खबर के मुताबिक मयंक अग्रवाल इसी सप्ताह टीम के साथ होंगे.

मान लेते हैं कि अग्रवाल बुधवार को टीम के साथ आए, तो क्या महज दो दिन प्रैक्टिस के साथ उन्हें शनिवार को मैच खिलाना जोखिम भरा नहीं है? अगर बांग्लादेश के खिलाफ मैच जीतकर भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया तब तो यह जोखिम उठाया जा सकता है. लेकिन अगर आखिरी मैच पर सेमीफाइनल का दारोमदार हुआ, तो क्या टीम इंडिया ऐसा जोखिम उठाएगी?

उसके बाद भी भारत के पास सिर्फ दो संभावित मैच और हैं, सेमीफाइनल और फाइनल. ऐसे में मयंक अग्रवाल का कितना इस्तेमाल हो पाएगा, इसे लेकर संदेह है.

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