अभिनंदन की वापसी: पूर्व IAF पायलटों को याद आए अपने दिन, सोने नहीं देती थी PAK आर्मी

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पाकिस्तान में पकड़े गए भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन की भारत वापिसी की सारी कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। पाकिस्तान पायलट अभिनंदन को वाघा बॉर्डर के रास्ते से भारत भेजेगा। वहीं अभिनंदन की वतन वापिसी के साथ ही नचिकेता और पूर्व एयर मार्शल की पुरानी यादें ताजा हो आईं। कंबंपति नचिकेता का कहना है कि पायलट का दिल हमेशा कॉकपिट में होता है। विंग कमांडर अभिनंदन भी वतन वापिसी के बाद फिर जल्द से जल्द कॉकपिट पर लौटना चाहेंगे। नचिकेता के अलावा 1971 के युद्ध में एयर कमोडोर जे. एल. भार्गव और 1965 के युद्ध में एयर मार्शल के. सी. करियप्पा भी गलती से पाकिस्तान पहुंच गए थे। तीनों ने पाकिस्तान की कैद में गुजारे अपने दिनों को याद किया।
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नचिकेता
साल 2017 में भारतीय वायुसेना से रिटायर हो चुके नचिकेता अब एक कमर्शियल पायलट हैं। नचिकेता बताते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे और उस दौरान मिग-27 में सवार थे, तभी उनका मिग-27 क्रैश होकर पाक अधिकृत कश्मीर में जा गिरा। खुद को बचाने के लिए उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर हवाई फायरिंग की लेकिन उनके सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया और काफी पीटा। पाक सैनिकों ने तो उन्हें मार डालने तक की कोशिश की लेकिन एक सीनियर पाकिस्तानी ऑफिसर ने उनकी जान बचाई। पाकिस्तानी ऑफिसर ने अपने जवानों को समझाया और स्थिति को संभाला। हालांकि इस दौरान उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया। लेकिन उनकी ट्रेनिंग इतनी शख्त हुई थी कि वे पाकिस्तान के आगे नहीं टूटे और उन्हें कुछ नहीं बताया।
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1971 के युद्ध में पकड़े गए थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट भार्गव
1971 के युद्ध में पकड़े गए एयर कमोडोर जे. एल. भार्गव कुछ दिन या महीने नहीं बल्कि पूरे एक साल तक पाकिस्तान के कब्जे में रहे थे। इस दौरान उन्हें अपनी वापिसी की कोई उम्मीद नहीं थी। पाकिस्तान में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए भार्गव ने कहा कि वे लोग सोने नहीं देते थे, जानकारी मांगते रहते थे। हर सवाल पर आप वहां न भी नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि जब मुझसे मेरे स्क्वॉड्रन के पायलट्स के बारे में पूछा जाता था तो मैं अपने भाई-बहनों का नाम बताता था। एक बार उन्होंने मुझसे पूछै था कि तुम्हारी स्क्वॉड्रन का बेस्ट पायलट कौन है तो मैंने जवाब दिया था कि वह आपके सामने बैठा है। वहीं भार्घव ने कहा कि अगर पाकिस्तानी स्थानीय भीड़ ने विंग कमांडर अभिनंदन का फोटो शेयर नहीं किया होता तो यह कह पाना मुश्किल हो जाता कि अभिनंदन जिंदा ही पाकिस्तान में गिरे थे क्योंकि वो लोग उनके साथ कुछ भी कर सकते थे।

12 घंटे तक छिपाई पहचान
भार्गव ने बताया कि पायलट्स को एक सर्वाइवर किट, एक पिस्तौल और कुछ पाकिस्तानी रुपए दिए जाते हैं ताकि अगर वे किसी संकट में फंस जाए तो खुद को बचा सकें। उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर 1971 को वे HF-24 9 में सवार थे, इसे पाकिस्तान ने गिरा दिया था। खुद को बचाने के लिए उन्होंने छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही सबसे पहले उन्होंने अपना सामान लिया, जी-सूट झाड़ियों में छिपाया और अपनी घड़ी पाकिस्तानी स्टैंडर्ड टाइम पर सेट की। भार्गव ने बताया कि वे करीब 12 घंटे तक अपनी पहचान छिपाने में कामयाब रहे। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें पकड़ा तो उन्होंने बताया कि मैं पाकिस्तानी एयरफोर्स का जवान हूं और मेरा नाम मंसूर अली है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी रुपए भी दिखाए। हालांकि एक स्कूल हेडमास्टर को उन पर शक हो गया था। उसने भार्घव से पूछा था कि तुम कहां से हो तो एयर कमोडोर ने जबाव दिया कि रावलपिंडी से। इस पर उसने पूछा कि रावलपिंडी में कहां से तो भार्गव ने कहा था, मॉल रोड से। इतना ही नहीं मास्टर ने उनसे झूठ भी बोला था कि वे तो भारत के गांव में खड़े हैं, इस पर भार्गव ने उन्हें पाकिस्तान भेजने की गुजारिश की थी जिस पर वह मान बैठा था कि मैं उनका नागरिक हूं। हालांकि, एक पाकिस्तानी रेंजर ने उनसे कलीमा पढ़ने को कहा, जब वह नहीं पढ़ पाए तो उन्हें गिरफ्तार करके पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया गया था।

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एयर मार्शल के. सी. करियप्पा
एयर मार्शल के. सी. करियप्पा 1965 की जंग के बाद 4 महीने तक पाकिस्तानी सेना की कैद में रहे थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया कि युद्ध खत्म हो गया है या चल रहा है। उनके जहाज को लड़ाई के आखिरी दिन गिराया गया था और वे सीधे पाकिस्तानी सेना के बीच गिरे थे। उन्होंने कहा कि वे जितने दिन भी पाकिस्तान के कब्जे में रहे, एक अनजाना डर बना रहता था कि न जाने अगले पल क्या हो जाए। वहीं करियप्पा ने आज की सोशल मीडिया की भूमिका पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि विंग कमांडर अभिनंदन ने अपनी निजी जिंदगी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी लेकिन सोशल मीडिया में लोगों ने उनके बारे में एक-एक बात बता दी जो कि गलत है। करियप्पा ने सोशल मीडिया को असंवदेनशील बताया और कहा कि इससे एक जवान पर ही नहीं उसके परिवार पर भी खतरा बन जाता है जो कि सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं भगवान का कि मेरे समय में सोशल मीडिया नहीं था।

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