जानें ऑटो सेक्‍टर में क्‍यों मचा है हंगामा, पटरी पर लाने के लिए सरकार क्‍या कर रही है उपाय

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अगस्‍त का महीना भी ऑटो सेक्‍टर के लिए कोई खुशखबरी न ला सका। अगस्‍त, प्रमुख ऑटो कंपनियों की बिक्री में गिरावट का लगातार 10वां महीना रहा है। घरेलू यात्री वाहनों में इस दौरान सालाना आधार पर 30.9 फीसद की गिरावट आई है। अर्थात लोगों ने गाड़ियां की खरीदारी अभी कम कर दी है। इसके कई कारण हैं। जैसे- बीएस4 से बीएस6 में शिफ्टिंग का चरण, लोगों का इलक्ट्रिक व्हीकल के लिए इंतजार या लोगों की खर्च क्षमता का घट जाना आदि। वाहनों की बिक्री घट जाने से इस सेक्टर पर बड़ी मार पड़ी है। शेयर बाजार की बात करें, तो ऑटो निफ्टी में शामिल 16 में से 15 कंपनियों के शेयर पिछले एक साल के दौरान 69 फीसद तक नीचे आए हैं।

ऑटो सेक्टर में मंदी के ये हैं मुख्य कारण

1. इस समय बीएस4 से बीएस6 में शिफ्टिंग का समय चल रहा है। ग्राहक अभी इस शिफ्टिंग के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, जिस कारण वाहनों की बिक्री में कमी देखने को मिल रही है।

2. उच्च जीएसटी दरों के कारण भी वाहनों की बिक्री में कमी आई है।

3. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में नकदी की किल्लत भी वाहनों की बिक्री पर बड़ा प्रभाव डाल रही है। वह इसलिए क्योंकि अधिकांश ग्राहक फाइनेंस करवाकर गाड़ियां खरीदते हैं। एनबीएफसी में नकदी की किल्लत के कारण ग्राहकों के लिए गाड़ी को फाइनेंस करवाना मुश्किल हो रहा है।

बिक्री में आ रही है भारी कमी

मारुति सुजुकी की बात करें, तो उसने जनवरी महीने में 1.42 लाख कारें बेची थीं और जुलाई महीने में उसकी सिर्फ 98,210 कारें बिकी हैं। कंपनी घरेलू बाजार में करीब 51 फीसद हिस्सेदारी रखती है। जुलाई महीने में मारुति कारों की बिक्री में 34 फीसद की कमी आई है, जो 7 सालों के दौरान किसी एक महीने में आई सबसे अधिक गिरावट है। मारुती सुजुकी इंडिया की अगस्त महीने की बिक्री में 32.7 फीसद की गिरावट दर्ज हुई है। कंपनी ने अगस्त 2018 में 1,58,189 वाहन बेचे थे, जबकि अगस्त 2019 में 1,06,413 वाहनों की ही बिक्री हुई है।

घरेलू बाजार की दूसरी बड़ी कंपनी है हुंदई। इस कंपनी की जनवरी में 45 हजार कारें बिकी थीं, जबकि जुलाई में केवल 39 हजार कारें ही बिकी हैं। इस समस्या के कारण ऑटो कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर भी संकट बना हुआ है। वाहनों की बिक्री में कमी आने से देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स ने अपने प्रोडक्शन को घटाया है। ऑटो सेक्टर में मंदी का असर वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ा है।

आय घटने के कारण गाडि़यां खरीदने से हिचक रहे हैं लोग

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के को-फाउंडर और वाइस चेयरमेन एम सी गुप्ता का कहना है कि इंडस्ट्रीज में स्लोडाउन की एक वजह लोगों की इनकम में आई कमी भी है। इस वजह से भी लोग नई गाड़ी लेने में हिचक रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ओला-उबर जैसी कैब सर्विस 24 घंटे मिलने से लोगों को घरेलू वाहनों की आवश्यकता भी कम पड़ने लगी है। कैब से ड्राइवर का खर्चा भी बच जाता है। उन्होंने कहा कि 4-5 साल पहले जो ऑटो इंडस्ट्री की स्थिति थी, वह जल्द लौटने वाली नहीं है।

सरकार ने किये ये उपाय

ऑटो सेक्टर में बिक्री को प्रोत्साहन देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च, 2020 तक खरीदे जाने वाले बीएस4 व्हीकल के रजिस्ट्रेशन अपने समय तक मान्य रहने की घोषणा की है। अर्थात कोई व्यक्ति मार्च, 2020 तक बीएस-4 इंजन वाला व्हीकल खरीदता है, तो उसकी गाड़ी की मान्यता अपने समय तक वैध रहेगी। इसके अतिरिक्त सरकार ने एनबीएफसी को मजबूत करने के भी प्रयास किये हैं, जिससे वे आसानी से ग्राहकों को वाहन खरीदने के लिए लोन दे सकें।

जल्द वाहनों पर जीएसटी घटा सकती है सरकार

आरबीआई से करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस राशि मिलने के बाद अब सरकार ऑटो सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए पैकेज की घोषणा कर सकती है। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार वाहनों पर जीएसटी रेट को भी घटा सकती है। इसके अलावा सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तंत्र से आने वाले 5 सालों में 40 हजार करोड़ का निवेश और 50 हजार नए रोजगार के अवसर विकसित करना चाहती है। सरकार की दस शहरों के निजी परिवहन में 2024 तक पचास फीसद इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन करने और 2030 तक सार्वजनिक परिवहन में एक हजार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना है। सरकार स्क्रैप नीति में बदलाव करके भी ऑटो सेक्टर को राहत देने का काम कर सकती है।

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