Women’s Day SPL: मजबूरी को मिसाल बनाया, पति को हुई दिल की बीमारी तो खुद उठाया चाबी-पाना

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आज के दिन पूरा विश्व महिलाओं के सम्मान व उनके हितों की रक्षा के लिए महिला दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर किसी न किसी महिला की एक स्टोरी आपको मिल जाती होगी। हरियाणा की एक महिला की साहस और हिम्मत की दास्तां जानकर आप भी इनके सम्मान में एक सैल्यूट देंगे। ये महिला हैं रोहतक जिले के डी पार्क में रहने वाली मुकेश जो काम ही ऐसा कर रही हैं, इनकी तरफदारी करता है। मुकेश के पति को दिल की बीमारी के साथ अन्य बीमारी के वजह से अक्षम होने पर इन्होंने सक्षमता दिखाते हुए मजबूरी को मिसाल बनाकर लोगों के सामने पेश किया।

PunjabKesari, women day special

दरअसल, मुकेश उनके नए जानकारों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं, क्योंकि वे टायरों में पंचर ठीक करती हैं। इन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से अपने बच्चों के साथ आते हैं। अपनी बाइक ओर स्कूटर में पंचर लगवाने वाले अंजान राहगीरों कहते हैं कि उन्होंने पहली बार देखा है, जब कोई महिला टायरों में पंक्चर ठीक करती हो। उनमें से कुछ कहना होता है कि उन्हें तो शर्म भी आ गई कि एक महिला टायर पंचर ठीक कर रही है, लेकिन वे इसके पीछे की कहानी से अंजान होते हैं।

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ये है मुकेश की मजबूरी को मिसाल बनाने की कहानी
नाम मुकेश देवी, उम्र 48 साल पता रोहतक डी पार्क, काम वाहनों के टायर पंक्चर ठीक करना और घर-गृहस्थ का भी सारा कार्यभार। मुकेश देवी की डी पार्क पर ही उनकी दुकान है। उन्होंने बताया कि साल 2006 में उनके पति को हार्ट अटैक की शिकायत हो गई थी, उसके बाद उन्हें काम करने में समस्या आ गई थी। जिसके बाद मुकेश ने अपने पति की सहायता के लिए शुरू-शुरू में शौकीन तौर पर वो दुकान में बैठने लगी। पति टायर पंचर का काम करते थे उन्हें औजार पकड़ाने में मदद करने लगी।

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जब उनके पति को स्वास्थ्य समस्या बढ़ी तो उनका शौक उनकी मजबूरी बना, लेकिन मुकेश ने मजबूरी को मिसाल बना कर एक सशक्त महिला का उदाहरण पेश किया है। मुकेश बताती हैं कि शुरू-शुरू उन्हें काम करने में शर्म आती थी, कोई रिश्तेदार आता था, तो वो भागकर अंदर चली जाती थी, लेकिन अब वो इन सब बातों से ऊपर हैं। वो दिल खोलकर काम करते हैं वो भी पूरे शान से।

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मुकेश के पति बताते हैं कि उन्हें मुकेश पर गर्व है और उन्होंने मुकेश के काम करने पर कभी एतराज नहीं हुआ। वहीं मुकेश की बुजुर्ग ननद मेवा देवी कहती हैं कि जब भी मुकेश गांव में आती है तो घूंघट डाल कर आती है। लेकिन यहां खुलकर काम करती है, जिसपर हमें गर्व है। बता दें कि उन्हें पिछले साल ही सशक्त महिला परिषद रोहतक द्वारा आत्मनिर्भर महिला होने का सम्मान भी दिया गया है।

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