यूं नहीं झुक गया पाक, इमरान ने इन 5 कारणों से छेड़ा वार्ता और शांति का राग

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इस्लामाबादः भारतीय पायलट अभिंनंदन की रिहाई के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान देश -विदेश में खूब वाहवाही लूट रहे हैं। लेकिन सच कभी ज्यादा देर तक पर्दे में नहीं रह सकता। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया हैरान है कि आखिर आंतक को पनाह देने वाला मुल्क पाक एकदम झुक कैसे गया और क्यों बार-बार वार्ता और शांति की दुहाई दे रहा है। सवाल ये भी है कि आखिर ऐसे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से पाक सरकार ने अपनी अकड़ और कपटी नीतियों को दरकिनार कर भारत से जंग न करने के लिए बातचीत की पेशकश की । आइए जानते हैं वो 5 मुख्य कारण जिनकी वजह से उसे झुकना पड़ा…
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कारण-1
आंतकवाद को लेकर पाक पूरी दुनिया में बदनाम हो चुका है। पुलवामा हमले के बाद पाक वैश्विक मंच पर बिल्कुल अलग-थलग पड़ चुका है। उस पर दुनिया के सभी देशों का आंतकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दबाव है जिसके चलते ही पाक ने भारतीय पायलट को लौटा कर अपनी साख को बचाने का प्रयास किया है। दरअसल पाक ने हमेशा आतंकियों की आड़ लेकर भारत पर हमला करता रहा है। शायद उसे उम्मीद थी कि हर बार की तरह भारत इस बार भी आतंकी हमले के बाद बातचीत की राह पर लौट आएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। भारत ने पाकिस्तान को चौंकाते हुए उसके बालाकोट स्थित सबसे बड़े आतंकी कैंप को हमले से नेस्तानाबूद कर दिया और उसे इसकी इसकी भनक भी नहीं लगने दी। इसके बाद इमरान खान ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए घात लगाकर भारतीय वायुसेना पर हमला किया और एक पायलट को बंधक बना लिया, जिसे जेनेवा कन्वेंशन के तहत पाक को अब छोड़ना पड़ा ।
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 कारण-2
दूसरा बड़ा कारण है पाक की कमजोर आर्थिक स्थिति। इन दिनों पाक मंदहाली के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है और इसे कर्ज की काफी जरूरत है। हालांकि आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोप के चलते उसे कर्ज मिलने में मुश्किल होती है। हाल ही में आतंकी फाइनैंसिंग को रोकने के लिए काम करने वाली संस्था फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में बरकरार रखा है। बता दें कि FATF की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है। इसलिए पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर खुद को शांतिप्रिय देश होने का दिखावा कर रहा है, जिसे उसे ब्लैक या फिर ग्रे लिस्ट से बाहर निकाल दिया जाए।
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कारण-3
तीसरा बडा करण है पाकिस्तान में चीन, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने निवेश का वादा किया है। इनमें से चीन जोर-शोर से निवेश कर रहा है, जबकि सउदी अरब ने 20 बिलियन डॉलर निवेश का वादा किया है। साथ ही यूएई की तरफ से भी निवेश का वादा किया गया है। लेकिन युद्ध होने पर पाकिस्तान से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) चला जाएगा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में निवेश की दर महज 15 फीसदी है। युद्ध के हालात में कोई भी देश निवेश नहीं करना चाहेगा। ऐसे में पाकिस्तान जैसा देश ज्यादा दिन तक खुद को चला नहीं पाएगा।
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कारण-4
रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो भारत को मालूम है कि पाकिस्तान मौजूदा वक्त में बड़ी जंग में शामिल होने की स्थिति में नहीं है। उस पर अमेरिका समेत उसके सदाबहार दोस्त चीन का दबाव है। दोनों ही देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से पाकिस्तान को युद्ध न करने की सलाह दी जा रही है। दरअसल चीन ने पाकिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर करीब 26.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसे वो 40 बिलियन डॉलर कर्ज और मुनाफे के साथ पाकिस्तान से वापस करेगा। हालांकि इसके लिए पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मजबूत होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चीन का पैसा फंस सकाता है।
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कारण-5
युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो जाएगा। पाक के पास महज 18 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। भारत इस मामले में पाक से 20 गुना आगे हैं। ऐसे में पाक के लिए जरूरी वस्तुओं का आयात करना मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पाकिस्तान के मुकाबले 9 गुना ज्यादा है। आर्थिक जानकारों की मानें तो युद्ध होने पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी करेंसी की कीमत गिरकर 200 रुपए प्रति डॉलर हो सकती है।

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