बच्चों के लिए जहन्नुम बना अफगानिस्तान, पिछले 5 साल में हवाई हमलों में 1600 बच्चों की गई जान

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इस्लामिच चरमपंथी संगठन जिहाद के नाम पर नामालुम कितने ही बेगुनाह लोगों की जान छीन चुके हैं और बात अफगानिस्तान की करें तो ये मुल्क को सालों से बदनीसीबी का दंश झेल रहा है। गृहयुद्ध की आग में जलते इस देश में अगर सबसे ज्यादा कोई प्रभावित हुआ है तो वो बच्चे और महिलाएं हैं। अफगानिस्तान में इस्लामिक चरमंथी गुट और सरकार के बीच संघर्ष में अगर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है तो वो बच्चों को पहुंचा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में अफगानिस्तान में हुए एयरस्ट्राइक में मरने वालों में 40 फीसदी बच्चे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों को मारने के लिए अफगानिस्तान में जो एयरस्ट्राइक किए गये, उनमें ज्यादातर बच्चे शिकार बने।

1600 मासूमों मे गंवाई अपनी जिंदगी

गुरुवार को एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में पिछले पांच सालों में हवाई हमलों में 1598 बच्चों ने अपनी जान गंवाई है। एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस ने रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में हवाई हमलों में अफगानिस्तान में कुल 3 हजार 977 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 1598 बच्चे शामिल हैं। गुरुवार को इस रिपोर्ट को पब्लिश किया गया है और उसके ठीक दो दिनों के बाग अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक गर्ल्स स्कूल को फिर से आतंकियों ने अपना निशाना बनाया, जिसमें 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में ज्यादातर बच्चियां शामिल हैं। अफगानिस्तान सरकार के मुताबिक मरनों वाले बच्चियों में ज्यादातर की उम्र 11 साल से 15 साल के बीच है।

हवाई हमलों के शिकार बच्चे

अफगानिस्तान के सेव द चिल्ड्रेन इंटरनेशनल के कंट्री डायरेक्टर क्रिस न्यामंडी के मुताबिक ‘ये दुख देने वाले आंकड़े हैं लेकिन ये आश्चर्यजनक नहीं हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘बच्चों के लिए अफगानिस्तान सबसे खतरनाक देश है।’ रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो देश की सीमानों ने लगातार आतंकियों को निशाना बनाने के लिए अफगानिस्तान के अलग अलग हिस्सों में हवाई हमले किए। जिनमें ज्यादातर बच्चे मारे गये है। रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में 247 बच्चे मारे गये तो 2019 में अफगानिस्तान में 957 बच्चे हवाई हमले में मारे गये। यूनाइटेड नेशंस ने भी इस रिपोर्ट के आने के बाद काफी दुख जताया है। क्रिस न्यामंडी के मुताबिक अफगानिस्तान में पिछले 14 सालों से सबसे ज्यादा बच्चे ही मारे गये हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में पिछले 14 सालों में हर दिन 5 बच्चे या तो हमले में मारे गये हैं या फिर घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘ये काफी ज्यादा परेशान करने वाला नंबर है और जब आप महसूस करते हैं कि ये बच्चे भविष्य थे, किसी के घर का हिस्सा थे, ये वो बच्चे थे जो स्कूल जाते थे और अपनी मर्जी से सुरक्षित तरीके से जिंदगी जीना चाहते थे।’

2018-19 में बरसाए गये सबसे ज्यादा बम

एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस के कार्यकारी निदेशक इअइन ओवेर्टन ने कहा कि ‘2018-19 में अफगानिस्तान में काफी ज्यादा बम बरसाए गये। इतने बम 2011 में भी उस वक्त नहीं बरसाए गये थे जब ओसामा बिन लादेन की तलाश की जा रही थी और अमेरिका अलकायदा से जंग लड़ रहा था। 2018-19 में अफगानिस्तान में हर दिन 20 से ज्यादा बम बरसाए गये। 2018-19 अफगानिस्तान के लिहाज से काफी ज्यादा खतरनाक साल रहा है और इसी साल में सबसे ज्यादा बच्चे अमेरिकी बमबारी में मारे गये हैं’। 2017 के मुकाबले 2018 में 85 प्रतिशत ज्यादा बम अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान की जमीन पर बरसाए थे। जिसमें हर तीन दिन में चार बच्चे मारे जा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक 57 प्रतिशत बच्चे अमेरिकी बमबारी में मारे गये हैं। क्रिस न्यामंडी के मुताबिक, अफगानिस्तान के लोगों का हर दिन खौफ में बीतता है और बच्चे हमेशा डर में जीते हैं कि कम कहां आसमान से बम गिरेगा और उनके चिथड़े उड़ जाएंगे। बच्चों को चरमपंथियों के बम का निशाना बनने का भी काफी ज्यादा खतरा होता है। अकसर चरमपंथी बच्चों को काफी निशाना बनाते हैं।

भविष्य में खतरा

अमेरिकन फौज इस साल 11 सितंबर तक अफगानिस्तान छोड़कर चली जाएगी लेकिन उसके बाद भी बच्चों के लिए खतरा कम नहीं होने वाला है। अफनागिस्तान में मानवाधिकार आयोगों मे आशंका जताई है कि अमेरिकी फौज जाने के बाद तालिबान और दूसरे आतंकी संगठन काफी ज्यादा धमाके करने शुरू कर देंगे। जो शुरू भी हो चुका है और निशाने पर बच्चे ही होंगे। जैसे काबुल बम धमाके में ज्यादातर छात्राएं शामिल हैं। वहीं, जानकारों का ये भी कहना है कि ‘अमेरिकी फौज के जाने के बाद अफगानिस्तान की वायुसेना आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशंस को अंजाम देगी और बम धमाके में बच्चे ही मरेंगे’। दरअसल, अफगानिस्तान में आने वाले वक्त में एक बार फिर से तमाम आतंकी संगठन अपना प्रभुत्व जमाने के लिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देंगे, जिनमें बच्चे की जिंदगी खतरे में रहेगी।

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