कैबिनेट से मंजूरी के बाद मनीष सिसोदिया ने बताया कैसे दिल्ली की शिक्षा बोर्ड बाकी राज्यों से होगा अलग

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अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्‍ली का अपना अलग शिक्षा बोर्ड बनाने का ऐलान किया है. कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी भी दे दी है. ऐसे में दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि कैसे दिल्ली का शिक्षा बोर्ड बाकी राज्यों के बोर्ड से अलग होगा. आजतक से बात करते हुए सिसोदिया ने कहा कि सरकार के इस फैसले से शिक्षा के दिशा में बड़ा सुधार होगा. उन्होंने कहा कि इस साल 25 से 30 स्कूलों को खोलकर दिल्ली शिक्षा बोर्ड की शुरुआत की जाएगी. 

दिल्ली के डिप्टी सीएम ने कहा कि एक दो सालों में बोर्ड के प्रदर्शन के बाद खुद लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि क्वालिटी एजुकेशन के लिए आज पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चों को इंटरनेशनल बोर्ड मिले. ऐसे में हम दिल्ली के शिक्षा बोर्ड को उसी तर्ज पर डेवेलप करेंगे. धीरे-धीरे इसे विकसित किया जाएगा और फिर इसकी मांग बढ़ेगी.  

मनीष सिसोदिया ने कहा कि NCERT आदि में जो विषय हैं वही पढ़ाए जाएंगे. उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हम बच्चों को सिर्फ किताबें रटने के लिए नहीं कहेंगे, हम उनका समुचित आंकलन करेंगे. वैज्ञानिक ढंग से शिक्षा हो तो अच्छी बात है. रटाने के बजाय चीजों को समझाने पर जोर दिया जाएगा. दिल्ली में इंटरनेशनल लेवल का बोर्ड बनाएंगे. 

दिल्ली के डिप्टी सीएम ने कहा कि सिर्फ बोर्ड बना देना ही हमारा मकसद नहीं है. हम क्वालिटी एजुकेशन के साथ, पूरी पढ़ाई को रिफॉर्म करेंगे. 

गौरतलब है कि अभी तक राज्‍य में केवल CBSE और ICSE बोर्ड की पढ़ाई होती है, मगर अब छात्र दिल्‍ली बोर्ड के संबद्ध स्‍कूलों में दिल्‍ली बोर्ड द्वारा प्रस्‍तावित सिलेबस की पढ़ाई कर सकेंगे. सीएम केजरीवाल का कहना है कि अन्‍य राज्‍यों के भी अपने शिक्षा बोर्ड हैं और दिल्‍ली बोर्ड की पढ़ाई 2021-22 सेशन से ही शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इस फैसले का असर केवल दिल्‍ली की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर होगा.

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