फिर चर्चा में Baba Ka Dhaba: बंद हुआ बाबा का नया रेस्टोरेंट, वापस वहीं पहुंचे जहां से किया था शुरू

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दिल्ली के ‘बाबा का ढाबा’ के मालिक कांता प्रसाद एक बार फिर से चर्चा में आए हुए हैं। दिल्ली के मालवीय नगर में स्तिथ ‘बाबा का ढाबा’ के मालिक 80 वर्षीय मालिक कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी की किस्मत जितनी जल्दी बदली थी, उतनी ही जल्द पलट भी गई। साउथ दिल्ली के मालवीय नगर में सालों से ‘बाबा का ढाबा’ वाले कांता प्रसाद का नया रेस्टोरेंट बंद हो गया है। कांता प्रसाद और उनकी पत्नी फिर से वहीं पहुंच गए हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी। यानी रेस्टोरेंट बंद होने के बाद कांता प्रसाद फिर से मालवीय नगर में अपना ‘बाबा का ढाबा’ चला रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2021 में ही उनका नया रेस्टोरेंट बंद हो गया था। बाबा का ढाबा’ वाले कांता प्रसाद साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान उस वक्त फेमस हुए थे, जब इनका रोते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था।

फरवरी में ही बंद हो गया था कांता प्रसाद का नया रेस्टोरेंट

वीडियो वायरल होने के बाद ‘बाबा का ढाबा’ वाले बाबा कांता प्रसाद को इतना डोनेशन और चंदा मिला कि उन्होंने नया रेस्टोरेंट खोल लिया। हालांकि इस साल फरवरी 2021 में भी कांता प्रसाद का नया रेस्टोरेंट बंद हो गया। मजबूरन कांता प्रसाद को वापस अपने पुराने ढाबे को चलाना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि वीडियो के वायरल होने के बाद जहां ‘बाबा का ढाबा’ की बिक्री में काफी उछाल देखा गया था। पिछले काफी वक्त से वहां भारी गिरावट आई है।

जानें क्यों बंद हो गया बाबा का नया रेस्टोरेंट

कांता प्रसाद ने दिसंबर 2020 में धूमधाम से अपना रेस्टोरेंट खोला था। इस रेस्टोरेंट में कांता प्रसाद अपने ग्राहकों के लिए रोटियां तो बनाते थे लेकिन साथ ही में काउंटर पर भी बैठते थे। कांता प्रसाद की पत्नी और उनके दोनों बेटे भी रेस्टोरेंट में काउंटर के पीछे बैठ कैश संभालते थे। कांता प्रसाद ने रेस्टोरेंट खाना बनाने वाले स्टाफ और वेटर भी रखे थे। शुरुआत में तो रेस्टोरेंट में ग्राहकों की बड़ी भीड़ देखी गई थी। लेकिन धीरे-धीरे ग्राहकों का आना कम हो गया। इनकम से ज्यादा रेस्टोरेंट पर खर्च होने लगा। ऐसी स्थिति में बाबा का नया रेस्टोरेंट बंद हो गया।

रेस्टोरेंट बंद होने पर कांता प्रसाद ने क्या कहा?

कांता प्रसाद ने कहा, ”मैंने रेस्टोरेंट में 5 लाख का निवेश किया था। तीन स्टाफ को काम पर रखा था। महीने का खर्च लगभग 1 लाख रुपये का था। 35,000 किराया, 36,000 हजार तीन स्टाफ की सैलरी, 15 हजार पानी-बिजली का बिल और खाने का सामना खरीदने के लिए। लेकिन हमारी औसत बिक्री महीने की 40 हजार से भी ज्यादा की नहीं हुई। मुझे काफी नुकसान झेलना पड़ा है। इसलिए हमने रेस्टोरेंट बंद किया। मुझे लगता है कि हमें रेस्टोरेंट खोलने की गलत सलाह दी गई थी।”

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