शांघाई संयोग संगठन(SCO) से भारत को क्या फायदे मिल सकते हैं?

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करीब तीन साल बाद शांघाई संयोग संगठन(SCO) का आयोजन Uzebekistan के समरकंद में होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को सम्मलेन में शामिल होने के लिए रवाना होंगे. शांघाई संयोग संगठन में जहां रूस अपने बल और चीन अपनी आर्थिक स्तिथि का दिखावा करेंगे तो भारत की कूटनीति और शालीनता देश का प्रचार करने जा रही है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी शिखर सम्मेलन के मौके पर कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे और साथ ही एससीओ गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। 2001 में इसकी स्थापना के बाद से, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर संगठन की अहम भूमिका रही है. इसका उद्देश्य “अतिवाद, अलगाववाद और आतंकवाद जैसी तीन बुराइयों” से लड़ना है और सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इस संगठन में चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान समेत कुल 9 देश मौजूद हैं. भारत भलेही इन संगठन में 2017 से शामिल है, लेकिन मध्य एशिया के इन सभी देशों के साथ अहम कूटनीतिक संभंध बनाने में सफल रहा है.

चीन के दबदबे को चुनौती दे सकता है भारत

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, एससीओ एक चीन-केंद्रित आठ-राष्ट्र समूह है. चीन केवल मौजूदा विश्व व्यवस्था को चुनोती ही नही दे रहा है बल्कि देशों को क़र्ज़ चुकाने के ज़रिये उन पर कब्ज़ा कर एक नयी व्यवस्था का निर्माण कर रहा है. चीन को चुनौती देने में दुनिया के दो बड़े देश भी नाकाम हो रहे हैं. अमेरिका के SCO में Observer के अनुरोध को संगठन ने ठुकरा दिया था. दूसरी तरफ यूक्रेन युद्ध के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे रूस का कद भी SCO में कम हो गया है. ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और क्वाड सदस्य देश भारत का कद और बढ़ जाता है.

भारत-चीन की मुलाकात पर चर्चा जारी

 मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में कोविड महामारी और चीनी दुस्साहस के कारण,  दोनों प्रधानमंत्रियों की बात होने की उम्मीदें कम जताई जा रही थी. मगर जुलाई में लद्दाख के आखिरी चरण की सहमति के बाद यह विषय और गरमा गया है. मोदी और शी आखिरी बार 13 नवंबर, 2019 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान महाबलीपुरम में दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा के पांच सप्ताह के भीतर मिले थे। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में कोविड महामारी और चीनी दुस्साहस के कारण, वे आमने-सामने नहीं मिले।

रूस से यूक्रेन युद्ध के बाद पहली मुलाकात

SCO में अगर सबसे ज्यादा निगाहें भारत-रूस की बैठक पर हैं. दरअसल, यूक्रेन युद्ध में भारत ने कभी भी अपने करीबी दोस्त रूस का खुलकर विरोध नहीं किया है। यूक्रेन पर हमले के बाद पुतिन ने दुनिया के जिन नेताओं से बात की थी उसमें पीएम मोदी भी थे। संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ कई अहम प्रस्ताव पर भारत अनुपस्थित रहा था। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच जी-20 और SCO को लेकर भी बड़ी चर्चा हो सकती है। इन दोनों संगठनों की अध्यक्षता अगले साल भारत को मिलने वाली है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। यूक्रेन में रूस के आक्रमण के बाद पहली बार पुतिन और पीएम मोदी के बीच आमने-सामने बैठक होगी।

उज़्बेकिस्तान से चाबहार पोर्ट पर होगी अहम चर्चा

उज्बेकिस्तान इस साल SCO का सञ्चालन कर रहा है. भारतीय प्रधानमंत्री और उज्बेकिस्तान के प्रधान मंत्री की चाबहार पोर्ट को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. आपको बता दें की चाबहार पोर्ट ओमान की खाड़ी के तट पर दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित चाबहार में एक बंदरगाह है। यह ईरान के एकमात्र समुद्री बंदरगाह के रूप में कार्य करता है, और ईरान के साथ-साथ भारत और उज्बेकिस्तान के लिए भी अहम भूमिका निभाते हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि इन बैठकों से क्या निष्कर्ष निकल का आते हैं.

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