महाराष्ट्र: अनिल देशमुख को नहीं मिली राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI की FIR रद्द करने वाली याचिका की खारिज

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महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को एक और छटका लगा है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख की एक याचिका खारिज कर दी है. इस याचिका में देशमुख ने भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की ओर से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी. इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें देशमुख के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के कुछ अंशों को चुनौती दी गई थी.

देशमुख और महाराष्ट्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एन.जे. जामदार की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका खारिज किए जाने लायक है. बता दें कि सीबीआई ने 5 अप्रैल को प्रारंभिक जांच के लिए हाईकोर्ट के आदेश के बाद 24 अप्रैल को देशमुख और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

घूस और वसूली के मामले के बाद देना पड़ा था इस्तीफा

करोड़ों रुपये के घूस और वसूली गिरोह मामले से जुड़े धन शोधन के मामले के चलते देशमुख को इस साल अप्रैल में गृह मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. मामले की जांच कर रही ईडी ने हाल ही में अनिल देशमुख के निजी सचिव संजीव पलांडे और निजी सहायक कुंदन शिंदे को गिरफ्तार किया था.

इससे पहले उसने इन दोनों और एनसीपी नेता के मुंबई और नागपुर स्थित आवासों पर छापे मारे गए थे. ईडी ने अदालत के आदेश पर दर्ज किए गए मामले और सीबीआई की प्रारंभिक जांच के बाद देशमुख और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था. कोर्ट ने सीबीआई को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा देशमुख के खिलाफ लगाए रिश्वत के आरोपों की जांच करने को कहा था. देशमुख ने आरोपों से इनकार किया है.

4.20 करोड़ रुपये की कीमत की संपत्ति की गई कुर्क

16 जुलाई को ईडी ने बताया था कि अनिल देखमुख और उनके परिवार के खिलाफ जबरन वसूली मामले से जुड़ी धनशोधन की जांच के संबंध में उसने 4.20 करोड़ रुपये की कीमत की संपत्ति कुर्क की गई है. धन शोधन निरोधक अधिनियम के तहत मुंबई के वर्ली में 1.54 करोड़ रुपये मूल्य के एक फ्लैट और रायगढ़ जिले के धुतुम गांव में 2.67 करोड़ मूल्य के 25 भूखंडों को कुर्क करने के शुरुआती आदेश जारी किए गए थे. ईडी ने आरोप लगाया था कि कुर्क संपत्तियां देशमुख के लाभकारी स्वामित्व वाली हैं.

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