चीन की मशहूर वैज्ञानिक ने इंटरव्यू में किया खुलासा- कोरोना वायरस चीन का जैविक हथियार है

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चीन ने जानबूझकर दुनिया में कोरोना वायरस को फैलाया है और इसके पीछे चीन की कम्यूनिस्ट सरकार है। ये सनसनीखेज खुलासा किया है, चीन की ही एक वैज्ञानिक ने। दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हाथ में कुछ कागजात लगे हैं, जिसमें कहा गया है कि पांच साल पहले से ही चीन कोरोना वायरस को तैयार कर रहा था और चीन तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी में जुटा हुआ था, जिसे वो जैविक हथियारों के सहारे लड़ने वाला था। इस खुलासे ने चीन की पोल पट्टी दुनिया के सामने खोलकर रख दी है। चीन की मशहूर वैज्ञानिक और महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येन ने अमेरिकन रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कहा है कि ‘चीन ने जानबूझकर कोरोना वायरस को दुनिया में फैलाया है।’ इंडिया टूडे से बात करते हुए चीन की महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येन ने कहा कि ‘ये खुफिया दस्तावेज पूरी तरह से सही हैं और चीन की साजिशों का पोल खोलने के लिए काफी है’।

चीनी वैज्ञानिक ने ही खोली पोल

इंडिया टूडे से बात करते हुए चीन की मशहूर वायरोलॉजिस्ट ली मेंग येन ने कहा कि ‘हां, ये दस्तावेज ये साबित करने के लिए काफी हैं कि चीन काफी लंबे वक्त से जैविक हथियार तैयार कर रहा था, ताकि वो युद्द में इसका इस्तेमाल कर सके और जैविक हथियार के जरिए चीन पूरी दुनिया पर अपना जीत हासिल करना चाहता था।’ ली मेंग येन ने इंडिया टूडे से बात करते हुए कहा कि ‘हां, आपने जिस डॉक्यूमेंट का हवाला दिया है और मैंने मार्च महीने में जिस डॉक्यूमेंट को दुनिया के सामने रखा था, वो यही कहता है कि चीन पारंपरिक युद्द से हटकर जैविक हथियारों का इस्तेमाल करने की कोशिश में था। इसके साथ ही चीन ने दुनिया के सामने कोरोना वायरस को लेकर गलत जानकारियां दी हैं, ताकि दुनिया को अंधेरे में रखा जा सके कि चीनी लैब से कोरोना वायरस नहीं निकला है’

क्या चीनी प्रयोगशाला से निकला वायरस?

आपने कहा था कि चीन के वुहान के मछली बाजार से कोरोना वायरस की उत्पत्ति नहीं हुई है बल्कि ये चीन के प्रयोगशाला में तैयार किया गया है, इस बात में कितनी सच्चाई है? इस सवाल का जवाब देते हुए ली मेंग येन ने कहा कि ‘मैंने इस बार में लोगों को बताने के लिए यू-ट्यूब का सहारा लिया और इस बात को मैं जनवरी महीने से कह रही हूं कि ये वायरस मछली मार्केट से नहीं बल्कि चीन के प्रयोगशाला से निकला हुआ है और ये प्रयोगशाला चीन की आर्मी पीएलए का है। जहां कोरोना वायरस तैयार करने के लिए काफी पैसे खर्च किए गये हैं। आखिरकार उन्होंने इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाले वायरस की खोज कर ली और फिर इसे जानबूझकर इंसानों के बीच छोड़ दिया गया। इस वायरस के बारे में चीन की सरकार को सबकुछ पता था और इसीलिए चीन में इसके प्रसार को फौरन रोक दिया गया।’

हादसे में वायरस बाहर आया या जानबूझकर?

इंडिया टूडे ने चीनी वैज्ञानिक से सवाल पूछा कि ‘आपने कहा है कि इस वायरस को जान बूझकर रिलीज किया गया और ये हादसा नहीं था तो क्या इसे जानबूझकर फैलाया गया ताकि दुनिया का हेल्थ सिस्टम बर्बाद हो सके’? इस सवाल के जवाब में चीनी वैज्ञानिक ने कहा कि ‘हां, इस वायरस का एक टार्गेट दुनिया के मेडिकल सिस्टम को बर्बाद करना भी था। दरअसल, में 5-6 साल पहले चीनी अधिकारियों ने कहा था कि इस वायरस से मृत्युदर काफी कम है लेकिन ये हेल्थ सिस्टम को पूरी तरह से तोड़ने में सक्षम है, ये समाज को काफी नुकसान पहुंचा सकता है’ उन्होंने कहा कि ‘पिछले साल वुहान में इस वायरस का ट्रायल किया गया था जिससे वुहान की स्थिति काफी खराब हो गई थी।’

चीनी मीडिया ने रिपोर्ट को खारिज किया

इंडिया टूडे के इस सवाल पर कि चीन की मीडिया ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि इसमें कुछ भी सबूत नहीं है, इसपर आप क्या कहेंगी? इस सवाल का जवाब देते हुए चीन की महामारी विशेषज्ञ ने कहा कि ‘चीन की सरकार की तरफ से रटा-रटाया जवाब दिया गया है कि ये सब चीन के खिलाफ साजिश है और गलत कैंपेन चलाया जा रहा है लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये वायरस प्राकृतिक है और इसके लिए इस वायरस को प्रकृति के मुताबिक होना पड़ेगा जो ये नहीं है। इसके साथ ही मैंने काफी ऐसे पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जिसमें वैज्ञानिक जानकारियां, इंटेलिजेंस जानकारियां शामिल हैं, जिसे चीन किसी भी सूरत में इनकार नहीं कर सकता है लेकिन उनका काम सिर्फ झूठ बोलना और दुनिया को अंधेरे में रखना है।’

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