युद्ध से बर्बाद हो चुके सीरिया में सात साल बाद चुनाव, राष्ट्रपति बशर अल असद की जीत पक्की

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युद्ध से बुरी तरह टूट चुके देश सीरिया में आज मतदान चल रहा है और सीरिया लोकतांत्रिक करवट लेता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस राष्ट्रपति चुनाव को महज औपचारिकता ही समझा जा रहा है और माना जा रहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की जीत तय है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि सीरिया के ज्यादातर हिस्से पर बशर अल असद सरकार का कब्जा है और ज्यादातर विरोधी नेता को देश से भगाया जा चुका है।

बशर अल बसद की जीत पक्की

पिछले कई सालों से युद्ध की वजह से बर्बादी के कगार पर खड़े सीरिया को विकास की जरूरत है और अब वहां सात साल के बात राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। आज हो रहे चुनाव में राष्ट्रपति बशर अल असद ने वोट डाला है और माना जा रहा है कि बशर अल असद भारी बहुमत से एकतरफा चुनाव जीतेंगे। सात साल पहले हुए चुनाव में बशर अल असद का जीतना काफी मुश्किल लग रहा था लेकिन ईरान और रूस के समर्थन की वजह से बशर अल असद का प्रभुत्व देश पर बढ़ता गया और अब दूसरी बार लगातार बशर अल असद राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत सकते हैं।

सीरिया में युद्ध का इतिहास

सीरिया में पिछले 10 सालों से ज्यादा वक्त से भयानक गृहयुद्द छिड़ा हुआ था और अब तक करीब 3 लाख 88 हजार लोग युद्ध की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं वहीं हजारों लोगों को सीरिया से अपनी जान बचाने के लिए पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा। अरब की सेना लगातार जिहादी संगठनों से लड़ाई लड़ रही है। पहले तो चरमपंथी समूहों ने होम्स शहर और अलेप्पो पर कब्जा कर लिया था लेकिन रूस की मदद से बशर अल असद सरकार ने फिर से कट्टरपंथियों के कब्जाए इलाकों को आजाद करवा लिया। लेकिन, इस प्रक्रिया के दौरान सीरिया में काफी खून बहा और दस लाख से ज्यादा लोग इस लड़ाई में विस्थापित हुए।

1970 से शासन में अल असद का परिवार

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद का परिवार 1970 से शासन में है और पूरे देश पर बशर अल असद के परिवार का कब्जा है। वहीं, इस बार के चुनाव को लेकर बशर अल असद के विरोधी सुहैल गाजी ने कहा है कि ‘2014 के चुनाव में बशर अल असद के हारने की संभावना थी लेकिन अब ज्यादातर उनके विरोधी देश से भगाए जा चुके हैं और अब सीरिया को लोग मानने लगे हैं कि बशर अल असद को हराना नामुमकिन है।’ उन्होंने कहा कि ‘इस चुनाव के बाद बशर अल असद और रूस दिखाने की कोशिश करेंगे की अब सीरिया सुरक्षित हैं और बाहर गये शरणार्थियों को अब देश लौट आना चाहिए’। आपको बता दें कि साल 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद की मौत के बाद बशर अल असद ने सत्ता संभाली थी। बशर अल असद आंखों के डॉक्टर हैं और उन्होंने सीरिया के लोगों से वादा किया था कि वे देश में राजनीतिक सुधारों को लागू करेंगे। लेकिन, 2011 में जब अरब क्रांति के समय सीरिया में भी प्रदर्शन होना शुरू हुआ तो उन्होंने भी हिंसा और दमन का रास्ता अपनाया और तब से करीब 3 लाख 88 हजार लोग सीरिया में मारे गये।

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