हैप्पी बर्थडे हिमा दास: जाने किन मुश्किलों से भरा था हिमा का सफर

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गोल्ड मेडलिस्ट एथलीट हिमा दास अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप (IAAF World U20 Championships) में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं.
भारत की शान और ढींग एक्सप्रेस के नाम से दुनिया में पहचान बनाने वाली हिमा दास आज (09 जनवरी) 21 साल की हो गई. असम के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया. जिंदगी के सारे संघर्षों को मात देकर उन्होंने देश के लिए ऐतिहासिक मेडल हासिल किया.
हिमा दास को गांव की गलियों से निकालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर लाने का श्रेय बचपन के कोच निपुन दास को जाता है जिन्होंने हिमा के परिवार को मनाया और ट्रेनिंग के लिए उन्हें गुवाहाटी ले आए. हिमा के कोच निपुन दास (Nipon Das) रहे थे. ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने हिमा की योग्यता पहचानी और उनके टैलेंट को गांव से बाहर निकालने की पहल की. बाद में उनकी कोच बनीं रूस की एथलीट गलीना बुखारीना (Galina Bukharina). हिमा की सफलता में इन दोनों लोगों का बड़ा हाथ रहा है.
2018 में ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) में देश का 4×400 मीटर में प्रतिनिधित्व किया था. वह इस इवेंट के फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट थीं. उन्हें जीत तो हासिल नहीं हुई लेकिन उन्होंने दुनिया को अपना दम जरूर दिखा दिया. फिनलैंड के ताम्पेर में हुई वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में हिमा दास ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. 400 मीटर की रेस में उन्होंने 51.46 सेकंड का समय निकालकर रेस जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया. इस इवेंट भारत का यह अंतरराष्ट्रीय पर यह मेडल था. हिमा दास को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था

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