माइग्रेन को दूर करने के लिए अपनी डाइट में शामिल करें सरसों के बीज

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आधुनिक समय में माइग्रेन आम समस्या बन गई है। इस बीमारी में सिर में बहुत तेज़ दर्द होता है। यह दर्द कई घंटों तक रहता है। इस दौरान पीड़ित को मितली और उल्टी भी हो सकती है। माइग्रेन आभासी और वास्तविक दो प्रकार होते हैं। जबकि, माइग्रेन होने के कई कारण हैं। इनमें मानसिक तनाव, नसों में खिंचाव, थकान, कब्ज, नशा, खून की कमी, सर्दी जुकाम प्रमुख हैं। इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह खतरनाक साबित हो सकती है। अगर आप भी माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट सरसों को जरूर शामिल करें। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

सरसों

सरसों को तिलहन की श्रेणी में रखा जाता है। इसका इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है। इससे जायके का स्वाद बढ़ता है। साथ ही सरसों तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है। सरसों में एंटीऑक्सिडेंट्स के गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर और अल्जाइमर बीमारी में फायदेमंद होते हैं। साथ ही सरसों के बीज में फाइबर पाया जाता है, जिसे पचाने में काफी समय लगता है। साथ ही फाइबर को पचाने में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। इससे कैलोरी बर्न होती है। डाइट चार्ट की मानें तो सरसों के बीज में कैलोरीज बहुत कम होती है।

माइग्रेन में आराम मिलता है

विशेषज्ञों की मानें तो सिरदर्द और माइग्रेन में सरसों के बीज फायदेमंद साबित होते हैं। सरसों के बीज मैग्नीशियम से भरे होते हैं, जो हमारे तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं और दर्द और तनाव को दूर करने में सहायक होते हैं। एक शोध से खुलासा हुआ है कि सरसों के बीज में राइबोफ्लेविनन पाए जाते हैं। इसके सेवन से माइग्रेन में आराम मिलता है। इसके लिए माइग्रेन के मरीजों को अपनी डाइट में रोजाना सरसों के बीज शामिल करना चाहिए। साथ ही इसके सेवन से उच्च रक्त चाप मे आराम मिलता है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

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