नींद न आना, डर और घबराहट महसूस होने पर तुरंत ले डॉक्टरों की सलाह, हो सकते हैं मानसिक बीमारी के शिकार

0
91

कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. बच्चे हों या युवा सबकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ रहा है. आंकड़े बताते हैं कि देश में मनोरोग के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. दुनिया के 15 फीसदी मानसिक रोगी भारत में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के बाद पैदा हुए हालातों से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है. इस परेशानी का समय पर इलाज़ होना बहुत जरूरी है. लापरवाही बरतना खतरनाक हो सकता है. मनोरोग विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी को नींद न आना, डर, घबराहट जैसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो तुरंत डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए.

मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास ने बताया कि मनोरोग एक ऐसी दशा है जो एक दिन में नहीं होती है. यह धीरे-धीरे बनती है. मानसिक परेशानियों के लक्षणों को आसानी से समझा जा सकता है. सबसे पहले जो पीड़ित व्यक्ति है उसके व्यवहार में बदलाव आ जाएगा. परिवार, समाज, साथ काम करने वाले सहयोगियों के प्रति उसके व्यवहार में चेंज आएगा. दूसरा, उसकी सोच में बदलाव आना, ऐसा बदलाव जिसकी कभी अपेक्षा नहीं की गई हो. इन बदलावों की वजह से अगर वो ख़ुद को नुकसान पहुंचाए या फिर अपने रोज़मर्रा के काम न कर पाए, तो समझना चाहिए कि उसे कोई मानसिक तकलीफ़ हो सकती है. उनके पास कई ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें हर समय डर सताता रहता है. मरीजों को नींद न आने की समस्या भी हो रही है. यह सब अवसाद के लक्षण हैं, जो आगे चलकर मानसिक बीमारी बन जाती है. इसलिए लोगों को इन लक्षणों पर ध्यान देकर डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए.

ऐसे पाया जा सकता है काबू

मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश की सलाह है कि मानसिक अवसाद जैसी बीमारी पर काबू पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सकारात्मक सोच रखना . लोगों को सोचना होगा कि अपनी परेशानियों का सामना करने के लिए वह अकेले नहीं हैं. किसी भी समस्या के बारे में लोगों को अपने परिवार वालों से खुलकर बात करनी चाहिए. सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा. किसी भी बीमारी के लिए डाक्टरों पर ही भरोसा करना होगा. सही समय पर पूरी नींद लेनी होगी. योग और प्राणायाम का भी सहारा लेना चाहिए. किसी भी शंका की स्थिति में डाक्टरों और मानसिक रोग विशेषज्ञों की सलाह लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए.

जागरूकता लाने की ज़रूरत

डॉक्टर ओम प्रकाश का कहना है कि मानसिक परेशानियों के विषय में समाज में बड़े पैमाने पर जागरूकता लाने की ज़रूरत है, वो भी हर स्तर पर. स्कूलों-कॉलेजों में या मीडिया के माध्यमों से यह काम हो सकता है.अगर कोई अपनी मानसिक परेशानी साझा कर रहा हो तो तुरंत उसको इलाज़ उपलब्ध कराया जाना चाहिए. अगर किसी इंसान के व्यवहार में अचानक बदलाव देखे तो उससे बात करनी चाहिए.

2020 के अंत तक बढ़ सकते हैं 25 फीसदी मरीज

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की 1.30 अरब की आबादी में से नौ करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी किस्म के मानसिक अवसाद की चपेट में हैं. संगठन ने एक रिपोर्ट में वर्ष 2020 के आखिर तक 25 फीसदी आबादी के मानसिक बीमारियों की चपेट में आने का अंदेशा जताया है.

सरकार ने जारी किया है हेल्पलाइन नंबर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने किसी भी प्रकार की मनो सामाजिक सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 080-4611007 जारी किया है. इस पर कॉल कर लोग सहायता ले सकते है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here