ग्लोबल वार्मिंग से प्लानेट की रक्षा के लिए भारत और फ्रांस की दोस्ती जरूरी- फ्रांस विदेश मंत्री

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फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ली द्रियान ने कहा है कि अगर दुनिया को बचाना है तो भारत और फ्रांस की बेहद मजबूत दोस्ती होनी चाहिए। भारत दौरे पर आए फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ली द्रियान ने नई दिल्ली में कहा है कि भारत और फ्रांस की दोस्ती प्लानेट को बचाने और वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कहा कि ‘हर महाद्वीप में पर्यावरण में उथल-पुथल को महसूस किया जा रहा है, ऐसे में लगातार बड़े स्तर पर सामूहिक तौर पर कोशिश किए जाने की जरूरत, इसीलिए प्लानेट में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम काम करने के लिए भारत और फ्रांस को एक साथ आना मेरे विचार से बेहद जरूरी है’

भारत-फ्रांस बातचीत

नई दिल्ली में आज भारत और फ्रांस के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई है। भारत के विदेश मंत्री एस, जयशंकर और फ्रांस के विदेश मंत्री की बैठक हुई। जिसमें दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बात हुई है। जिसमें बात करते हुए फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ली द्रियान ने कहा है कि ‘मेरी अभी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात और बातचीत हुई है। भारत और फ्रांस की दोस्ती सामूहिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है, अगर मैं सीधे शब्दों में कहूं तो हमारे फ्यूचर जेनरेशन के भविष्य के लिए भारत और फ्रांस को एक साथ आना चाहिए’। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘भारत और फ्रांस सीओपी26 के लिए लीडरशिप की भूमिका निभा सकते हैं’

पेरिस समझौते पर बात

भारत के दौरे पर आए फ्रांस के विदेश मंत्री और भारतीय विदेश मंत्री के बीच सीओपी 26 यानि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, जो इस साल एक नवंबर से 12 नवंबर के बीच होने वाली है, उसको लेकर भी बात हुई है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि ‘इसी साल जलवायु परिवर्तन सम्मेलन भी होना है, लिहाजा ये साल भारत और फ्रांस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लिहाजा ये जरूरी हो जाता है कि इस वैश्विक मसले पर हम एक दूसरे का साथ दें’। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर खतरे की आशंका भी जताई है। उन्होंने कहा कि पेरस एग्रीमेंट के मुताबिक अगर ग्लोबर वार्मिंग को हम 2 डिग्री सेल्सियस या फिर डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक रखने में कामयाब हो जाते हैं, तो ये काफी अच्छी बात होगी, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर दुनिया को इसके अंजाम भुगतने होंगे।

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