हिंसा पर राजनीति जारी, ओवैसी ने कहा- नकाबपोशों को घुसने का मिला ग्रीन सिग्नल

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार रात अचानक हुई हिंसा और उसमें कई छात्रों के घायल होने के बाद फिलहाल तो कैंपस में शांति है और भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है लेकिन इस हिंसा ने देश में नई राजनीति शुरू कर दी है। दिल्ली विधानसाभा चुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम के बाद अब विपक्ष को फिर से सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार और भाजपा ने हिंसा की निंदा की है। JNU ने भड़की इस हिंसा की सभी दलों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप भी लगाए हैं। जानिए कौन क्या कह रहा है:-

– मामले में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी का बयान आया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस पॉवर ने उन्हें अंदर घुसने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया था। मैं इस हमले की निंदा करता हूं। इसमें कोई शक नहीं कि जो पावर में हैं उन्होंने नकाबपोशों को अंदर घुसने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया। उन्होंने कायरों की तरह चेहरा छिपा रखा था और हाथों में छड़ी और लोहे की रॉड्स थी। इसमें भी सबसे बुरा यह कि एक वीडियो दिखाता है कि पुलिस ने उन्हें जाने दिया।

– केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि लेफ्ट के छात्र जेएनयू को बदनाम करने में लगे हैं। वो जेएनयू को गुंडागर्दी का केंद्र बना रहे हैं।

– कांग्रेस नेता कपिल सिबल ने कहा कि, किसने नकाबपोशों को कैंपस में जाने दिया?, वाइस चांसलर क्या कर रहे थे? पुलिस बाहर की तरफ क्यों खड़ी रही? केंद्रीय गृहमंत्री क्या कर रहे थे? ये सभी सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। यह स्पष्ट रूप से एक षडयंत्र है।

– केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा कि यह असहिष्णुता का नतीजा है। जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर नाजी स्टाइल में हुआ यह हमला उन लोगों द्वारा करवाया गया है जो देश में अशांति लाना चाहते हैं। कैंपस में इस तरह का खेल बंद होना चाहिए।

– भाजपा नेता और जेएनयू के छात्र रहे विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हिंसा की निंदा की है। सीतारमण ने इसे डरावना बताया और कहा कि मोदी सरकार सभी विश्वविद्यालयों को छात्रों के लिए सुरक्षित स्थल बनाना चाहती है।

– वहीं, जयशंकर के साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे विश्वविद्यालय की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ बताया।

– भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जेएनयू में देश को टुकड़े टुकड़े करने वाले विचारधारा के लोग रहते हैं, जो आतंकवादी को सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा को हत्या बताते हैं।

– वहीं, भाजपा का तरफ से देर रात किए गए ट्वीट में इस घटना के लिए अराजकतावादी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया गया, जो अपनी सिमटती राजनीति को धार देने के लिए छात्रों को बलि का बकरा बना रहे हैं।

– वामदलों के नियंत्रण वाले जेएनयू छात्र संघ और भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है।

– राकांपा प्रमुख शरद पवार ने इसे गैर लोकतांत्रिक और नियोजित हमला बताया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल छात्रों के प्रति समर्थन जताने जेएनयू जाएगा।

– कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश पर शासन करने वाली फासीवादी ताकतें छात्रों से डर गई हैं। यह हिंसा उसी डर को दिखाती है। कांग्र्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसे छात्रों से मोदी सरकार का बदला करार दिया है। पी. चिदंबरम ने कहा कि यह सब लाइव टीवी पर आ रहा था, जिससे जाहिर होता है कि सरकार को इसका समर्थन था।

– माकपा नेता सीताराम येचुरी ने हिंसा के लिए जेएनयू प्रशासन और एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे हिंदुत्व के एजेंडे का विरोध करने वाले छात्रों पर नियोजित हमला करार दिया।

– महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे, पुणे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान और द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने भी जेएनयू में हुई हिंसा की निंदा की है।

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