फूलनदेवी की हत्यारे शेर सिंह राणा ने रचाई है रसूखदार की बेटी से शादी

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सपा सांसद फूलन देवी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पा चुके शेर सिंह राणा ने मध्य प्रदेश के छतरपुर से पूर्व विधायक की बेटी के साथ रुड़की में शादी कर ली। जमानत पर जेल से बाहर आए शेर सिंह राणा ने दहेज में मिली 10 करोड़ की खदान, 31 लाख रुपए के शगुन को ठुकराकर चांदी का सिक्का लेकर शादी की रस्म अदा की। जानते हैं कौन है शेर सिंह राणा और फूलन देवी से क्या थी उसकी रंजिश…

दस्यु सुंदरी रही फूलन देवी की 25 जुलाई 2001 को राजपूत युवक शेरसिंह राणा उर्फ पंकज सिंह ने हत्या कर दी थी। बेहमई कांड का बदला लेने के लिए राणा ने इस वारदात को दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक माने जाने वाले अशोका रोड पर अंजाम दिया था।

उसने फिल्मी अंदाज में मिर्जापुर की सपा सांसद फूलन देवी को सरेआम गोलियों से छलनी कर उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद राणा ने कहा था कि उसने बेहमई में 22 राजपूतों की हत्याओं का बदला लिया है। हालांकि, बेहमई कांड में राणा की फूलन से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी।

क्या था बेहमई कांड

डकैत फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को बेहमई में 22 ठाकुरों को सरेआम गोली मार दी थी। कानपुर देहात से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक राजपूत बहुल गांव में आज भी फूलन देवी के कहर की गूंज सुनाई देती है। हालांकि, बेहमई हत्याकांड के बाद फूलन देवी गिरोह पुलिस के निशाने पर आ गया और मुठभेड़ों में फूलन का गैंग करीब-करीब खत्म कर दिया गया।

ऐसे आई राजनीति में

फूलन जिस जाति से आति थी उस जाति का मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अच्छा-खासा वोट बैंक है। कहा जाता है कि उस पर पकड़ बनाने के लिए इंदिरा गांधी के कहने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने फूलन देवी को सरेंडर करवाया।

इसी वोटबैंक के लिए फूलन देवी के खिलाफ चल रहे सभी मामले को यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वापस ले लिया और उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल कर सांसद बनवा दिया। फूलन देवी को सांसद बनाने के बाद राजपूत समुदाय के जख्म को एक बार मुलायम सिंह यादव ने उभार दिया था। ठाकुरों की मौत का बदला लेने के लिए राणा ने फूलन की हत्या कर दी थी।

सरेंडर किया और तिहाड़ से भाग निकला

इसका बदला लेने के लिए शेर सिंह राणा ने फूलन पर हमला किया था। इसके दो दिनों के बाद आरोपी शेरसिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। तब राणा ने गर्व के साथ फूलन की हत्या में शामिल होने की बाद स्वीकारी थी।

हालांकि अपनी किताब ‘जेल डायरी’ में राणा ने पुलिस पर जुर्म कुबूल करवाने के लिए मजबूर करने का आरोप भी लगाया। अगस्त 2014 में दिल्ली की एक निचली अदालत ने फूलन देवी हत्याकांड के दोषी शेर सिंह राणा को उम्रकैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हालांकि, शेर सिंह राणा करीब तीन साल बाद 17 फरवरी 2004 को तिहाड़ जेल से फिल्मी अंदाज में भाग निकला।पुलिस की काफी मशक्कत के बाद 17 मई 2006 को शेरसिंह राणा को कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से एक बार फिर से गिरफ्तार किया।

पृथ्वीराज चौहान की लाया अस्थियां

फरारी के दिनों के बारे में खुलासा करते हुए राणा ने कहा था कि अफगानिस्तान के गजनी इलाके में हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों के अपमान की बात बचपन से सुनता आ रहा था। राणा ने पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों को वापस लाने की ठानी। तिहाड़ जेल से फरारी के बाद राणा ने झारखंड के रांची से फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इसके बाद वह नेपाल, बांग्लादेश, दुबई होते हुए अफगानिस्तान पहुंचा। साल 2005 में वह पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लेकर भारत आया। अपनी बात को साबित करने के लिए राणा ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो भी बनाया।

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