बकरीद पर ढील: सुप्रीम कोर्ट का केरल सरकार को फटकार, कहा- नागरिकों के अधिकारों को ताक पर रखा गया

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केरल सरकार की तरफ से बकरीद पर छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान सरकार को कड़ी फटकार लगाई. जस्टिस आरएफ नारिमन ने केरल सरकार से कहा कि टेक्सटाइल और फुटवियर जरूरी सामान के दायरे में नहीं आता, जिसे आपकी ओर से मंजूरी दी गई जबकि राज्‍य में पॉजिटिविटी रेट बहुत ज्यादा है.

कोर्ट ने कहा कि हमने केवी नांबियार के आवेदन को सुना, जो अखबारों में छपी खबरों के आधार पर केरल सरकार की तरफ से बकरीद को लेकर दी गई छूट के खिलाफ दी गई थी. केरल सरकार ने हलफनामा दाखिल किया, जिसमें 9 से 11 तक और अन्य संबंधित दस्तावेज हैं. 15 जून को जारी नोटिफिकेशन में जो कैटेगरी रखे गए, उसमें कम संक्रमण क्षेत्र से लेकर गंभीर संक्रमण क्षेत्र को वर्गीकृत किया गया.

दूसरे नोटिफिकेशन में सात चीजों को जरूरी सामान के दायरे में रखकर दुकानों को खोलने की छूट दी गई. ये छूट गंभीर संक्रमण वाले क्षेत्रों में 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ दी गई है. 7 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में बकरीद को लेकर छूट दी गई. इसमें सभी गैर जरूरी दुकानों को ‘अ’ कैटेगरी में खोला गया. इसमें लोगों को सावधानी के साथ दुकानों से खरीद करने को कहा गया. बहुत ही गंभीर है कि डी वर्ग में भी छूट दी गई, इसमें उन लोगों को दुकानों पर जाने की छूट दी गई जो वैक्सीन का एक डोज ले चुके थे.

जीवन के अधिकार को खतरे में डाला गया- सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि जीवन के अधिकार को खतरे में डाला गया. केरल सरकार का ये बहुत ही दुभाग्यपूर्ण रवैया है, जिसने अनुच्छेद 21 और 144 का ख्याल नहीं रखा और नागरिकों के अधिकारों को ताक पर रख दिया. साथ ही कहा कि इस तरह की नीतियों से कोविड संक्रमण में तेजी आने कि पूरी संभावना बनती है. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का दबाव भारत के नागरिकों के जीवन के अधिकार के सबसे कीमती अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है, अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो कोई भी जनता इसे हमारे संज्ञान में ला सकती है और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

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