भारत को 25 साल बाद लगा इतना बड़ा झटका, इस खेल के पुरुष और महिला दोनों ही इवेंट के फाइनल से हुआ दूर

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टोक्यो ओलिंपिक के अभी तक के सफर में अगर महिला वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू का जीता हुआ सिल्वर मेडल भारत का जोश बढ़ाता दिखा है, तो निशानेबाजी में हाथ आई निराशा ने उस जोश को कम करने का काम भी किया है. सीधे लब्जों में कहें तो भारतीय निशानेबाजी से जुड़ी आशा बुरी तरह से निराशा में बदलती दिखी है. और इसका असर ये हुआ है कि 25 साल बाद ओलिंपिक के शूटिंग रेंज में भारत को एक बड़े झटके से दो चार होना पड़ा है. भारत को ये झटका शूटिंग के 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में लगा है.

दरअसल, 1996 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत शूटिंग के 10 मीटर एयर राइफल इवेंट के महिला या पुरुष वर्ग में से किसी के भी फाइनल में जगह पक्की करने में नाकाम रहा है. भारत को इस इवेंट के महिला और पुरुष वर्ग के क्वालिफिकेशन राउंड में ही हार का सामना करना पड़ा है.

1996 में जो हुआ था वो टोक्यो में हुआ

टोक्यो ओलिंपिक के दूसरे दिन भारत की महिला निशानेबाजों ने 10 मीटर एयर राइफल इवेंट के फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकीं. तो तीसरे दिन वही हाल पुरुष वर्ग में देखने को मिला. जैसे अपूर्वी और इलावेनिल की राइफल से भारत को निराशा मिली थी ठीक वैसी ही जुड़ी आशा दिव्यांश पंवार और दीपक के राइफल से निकली गोली के बाद भी टूट गई. इसी के साथ ये तय हो गया कि भारत 1996 के बाद पहली बार 10 मीटर राइफल इवेंट के फाइनल में फायर नहीं करने जा रहा है.

न राइफल चली न पिस्टल

वैसे, टोक्यो में सिर्फ भारत के राइफलधारियों का ही निशाना नहीं चूका है. पिस्टलवालों ने भी निराश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. तीसरे दिन मनु भाकर और यशस्विनी से मिली निराशा से पहले दूसरे दिन सौरभ और अभिषेक का निशाना मिस होने का दर्द भारत झेल चुका था. ऐसे में अब सारी उम्मीदें शूटिंग के मिक्स्ड इवेंट पर आकर टिक गईं हैं.

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