उन्नाव केस: दोनों पीड़िताओं का हुआ अंतिम संस्कार,भारी पुलिस बल रहा तैनात,गांव छावनी में तब्दील

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उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बुधवार को मिले बुआ भतीजी के शव आज पंचतत्व में विलीन हो गए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुआ-भतीजी का अंतिम संस्कार जहां पर दोनों के शव मिले थे उससे कुछ ही दूर खेत में कराया गया। बुआ-भतीजी के शवों को जब परिजन लेकर जा रहे थे तो गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान गांव और आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। 

कमिश्नर रंजन कुमार, आईजी लक्ष्मी सिंह, डीएम रवींद्र कुमार, एसपी आंनद कुलकर्णी भी उस जगह पर मौजूद रहे जहां दोनों का अंतिम संस्कार हुआ। राजनीतिक दलों के प्रदर्शन और हंगामे की संभावना को देखते हुए पूरे गांव और गांव को जाने वाले सभी रास्तों पर भारी पुलिस तैनात कर दिया गया है।

उन्नाव में असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गांव में दोनों किशोरियों की मौत जहर से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। विसरा सुरक्षित कर फोरेंसिक लैब में जहर की जांच कराई जाएगी। मृतक किशोरियों के शरीर पर एक भी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हाथ-पैर बांधे जाने के साक्ष्य न तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए हैं और न ही पुलिस की जांच में। 
बबुराह गांव की तीनों बेटियां रिश्तेदार थीं। दो चचेरी बहनें थीं तो तीसरी उनकी भतीजी। इन रिश्तों पर दोस्ती का रिश्ता भारी था। हम उम्र होने की वजह से तीनों दोस्त की तरह रहती थीं। बचपन साथ गुजारा और अब भी वह एक साथ ही काम करती थीं, खेलती थीं और घूमती थीं। इत्तेफाक ऐसा कि इनमें से दो की मौत भी एक साथ आई। तीसरी मौत से जंग लड़ रही है। 
परिजनों ने बताया कि काजल, कोमल और रोशनी की उम्र में बहुत कम अंतर था। एक ही गांव में रहने की वजह से बचपन से ही साथ में पली-बढ़ीं। हर रोज सुबह-शाम एक साथ खेत में काम करने जाती थीं। कभी लकड़ी लेने तो कभी चारा लेने। बुधवार को भी तीनों एक साथ चारा लेने खेत गई थीं। वहां पर वारदात को अंजाम दिया। 
अब रोशनी ही बताएगी सच 
खेत में जो कुछ भी हुआ, वह रोशनी को ही पता है। अभी वह होश में नहीं है। रोशनी ही सच बता सकती है। वही गुनहगारों को पहचानती है। उसके होश में आने पर वारदात से पर्दा उठेगा। हर कोई दुआ कर रहा है कि किसी तरह से जल्द से जल्द रोशनी की तबीयत ठीक हो। देर रात गांव में शव पहुंचते ही कोहराम मच गया था। मृतकों के परिवारों के लोग सड़क पर आ गए और दहाड़ मारकर रोने लगे। हर कोई उनको ढांढस बंधाने में जुटा रहा था। ये नजारा देख ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं।

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