रिजर्व बैंक के फैसले के बाद बैंक कस्टमर्स के खातों पर क्या पड़ेगा असर?

0
40

 

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से एमपीसी की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है। रेपो और रिजर्व रेपों दरों में कोई बदलाव ना करने के बाद भी एफडी अकाउंट होल्डर्स को काफी राहत की सांस ले लेंगे। इसका कारण है कि बैंक अब अपनी एफडी दरों को कम नहीं करेंगे। वहीं दूसरी और पर्सनल लोन, होम लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरें भी कम नहीं होंगी।

 

एफडी निवेशकों को मिलेगा लाभ
– नीतिगत ब्याज दरें स्थिर रहने से फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए बचत करने वालों के लिए अच्छी खबर है।
– बैंक आगे भी एफडी पर ब्याज दर घटाने का फैसला नहीं लेंगे।
– एसबीआई ने सितंबर 2020 से एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
– एफडी पर एसबीआई 2.9 फीसदी से लेकर 5.4 फीसदी तक ब्याज दे रहा है।

 

सेविंग अकाउंट पर असर
– नीतिगत दरों में कटौती के बाद बैंक भी एफडी दरें घटाते हैं, लेकिन सेविंग अकाउंट में ऐसा नहीं होता।
– डिपॉजिट रेट में यह कटौती रेपो रेट के अनुपात में नहीं होती है।
– बैंक में पैसे जमाकर्ता के तौर पर देखें तो ब्याज दरें घटने का मतलब है कि अकाउंट में नए डिपॉजिट पर कम ब्याज मिलेगा।
– जिसका अर्थ है जमाकर्ता के डिपॉजिट पर रिटर्न भी कम मिलेगा।
– ब्याज दर बढऩे से मतलब है कि डिपॉजिट पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

 

लोन की ईएमआई पर असर
– रेपो रेट में कोई बदलाव ना होने का अर्थ है लोन की ईएमआई नहीं घटेगी।
– इस साल मार्च के बाद से केंद्रीय बैंक में पॉलिसी दरों में 115 आधार अंकों तक की कटौती की थी।
– आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में आखिरी बार बदलाव 22 मई को को किया था।




LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here