यूपी में कोरोना मरीजों की पहचान के लिए गांवों में घर-घर जाकर शुरू हुई जांच, WHO ने योगी सरकार के कदम को सराहा

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उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफी तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को दावा किया कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रदेश में वृहद स्तर पर चलाए गए ‘अर्ली, अग्रेसिव, ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट’ अभियान के व्यापक परिणाम सामने आए हैं और पिछले 10 दिनों में राज्य में कोरोना के सक्रिय मामलों में 85,000 से अधिक की कमी आई है।

बता दें कि राज्य सरकार के इस प्रयास को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सराहा है। स्वास्थ्य संगठन ने इस अभियान की तुलना पोलियो अभियान से भी की। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में COVID-19 के मद्देनजर हाउस टू हाउस एक्टिव केस फाइंडिंग शुरू की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में उन लोगों को जल्द से जल्द आइसोलेट किया जाता है जिनमें कोविड के लक्षण हैं।

WHO की रिपोर्ट में क्या किया गया दावा?

वैश्विक एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में सरकार की टीमें पांच दिनों में 75 जिलों के 97,941 गांवों में जाएंगी। यह अभियान 5 मई को शुरू हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, हर मॉनिटरिंग टीम में दो सदस्य होते हैं, जो रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) किटों का उपयोग करके उन लोगों का टेस्ट करते हैं जिनमें लक्षण हैं। इस दौरान जो पॉजिटिव पाए जाते हैं उन्हें जल्दी से आइसोलेट किया जाता है और एक मेडिसिन किट दी जाती है। जो लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनके संपर्क में आए लोगों की RT-PCR जांच कराई जाती है।

सभी जिलों के हर ब्लॉक पर दो मोबाइल वैन आवंटित

WHO की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य के सभी जिलों के हर ब्लॉक में दो मोबाइल वैन आवंटित की गई हैं। इसके साथ ही नियमित रूप से और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेस्टिंग और सैंपलिंग जारी है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इस अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग से 141,610 टीमों और 21,242 पर्यवेक्षकों को तैनात किया है ताकि सभी गांवों तक पहुंच हो सके। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस अभियान के दौरान उसके फील्ड ऑफिसर्स ने 2,000 से अधिक सरकारी टीमों की निगरानी की और कम से कम 10,000 घरों का दौरा किया।

रिपोर्ट में कहा गया है क‍ि कोविड के सिंपटम वाले लोगों की टेस्टिंग की जाती है और मेडिसिन किट दी जाती है। घर पर और अस्पतालों में क्वारंटीन और आइसोलेशन की जानकारी दी जाती है। जिन लोगों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है उन्हें वैक्सीनेट भी किया जा रहा है। अपनी रिपोर्ट में WHO ने कहा है कि गांवों में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने ग्रामीणों को कोविड प्रोटोकॉल के बारे में भी बताया। WHO ने कहा- पोलियो उन्मूलन रणनीति के दौरान भारत में टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो प्लानिंग, हाउस विजिट, मॉनिटरिंग और फॉलोअप पर खास जोर था।

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