कांग्रेस का कौन होगा अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल या कोई और? 23 जून को होगा फैसला

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कांग्रेस में लंबे समय से अध्यक्ष को बदलने को लेकर की जा रही मांग का सोमवार को पटाक्षेप हो गया. अब पार्टी में अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? क्या एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार का ही कोई सदस्य पार्टी की कमान संभालेगा या फिर इस परिवार से इतर कोई दूसरा नेता इसकी बागडोर संभालेगा? इस बात के फैसले के लिए सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में संगठन के आतंरिक चुनाव कराने पर फैसला ले लिया गया है. बताया जा रहा है कि आगामी 23 जून को कांग्रेस का अध्यक्ष चुनने के लिए सांगठनिक चुनाव कराया जाएगा.

इस बीच, सवाल यह भी पैदा होता है कि इस चुनाव में भी पहले ही की तरह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ पार्टी का दूसरा नेता अध्यक्ष पद के नामांकन दाखिल करेगा या इस बात भी इन्हीं में से किसी एक को निर्विरोध पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया जाएगा.

राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा ऐसे कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं कि इस बार के भी सांगठनिक चुनाव में नेहरू-गांधी परिवार से इतर पार्टी का कोई नेता अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं कर सकेगा. हालांकि, यह बात दीगर है कि पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेता सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर संगठन में फेर-बदल करने की मांग करते आए हैं, लेकिन असली मोर्चे पर कोई भी मुखर होकर मुकाबला नहीं कर पा रहा.

गौरतलब है कि वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था. इसके बाद पार्टी के सिपहसालारों द्वारा उन्हें कई बार मनाने की कोशिश की गई, लेकिन वे दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए तैयार नहीं हुए. इसके बाद सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था. अभी भी कांग्रेस की बागडोर सोनिया के हाथों में है. ऐसे में एक बार फिर वही सवाल दोबारा खड़ा हो रहा है कि क्या राहुल गांधी अभी इस पद को अपनाने के लिए तैयार हैं या नहीं?

इससे पहले ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी ये मुद्दा उठा था, जब बागी नेताओं ने आंतरिक चुनाव की मांग रखी थी. अब सबसे बड़ी धर्मसंकट में सोनिया गांधी फंसी हुई हैं. सोनिया गांधी कई बार कांग्रेस अध्यक्ष पद को ना अपनाने की बात कर चुकी हैं, लेकिन जब लोकसभा चुनाव के बाद राहुल ने पद पर न बने रहने ऐलान किया, तो सोनिया गांधी के पास खुद बागडोर संभाले के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था. कांग्रेस पार्टी के सामने संकट फिर खड़ा हो रहा है कि वे गांधी परिवार से अलग नेतृत्व को नहीं देख रहा है.

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