विश्व कैंसर दिवस: जाने क्यों मनाया जाता है कैंसर दिवस और क्या है इसका उद्देश्य

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इस दौड़ती-भागती जिंदगी में इंसान कब कौन सी बीमारी से घिर जाए, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। बदलते दौर में एक के बाद एक ऐसी बीमारियां सामने आ रही हैं जो मानव जाति को काफी डरा रही हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है कैंसर। विश्व भर में हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। साल 1933 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी और इसके पीछे ये उद्देश्य रहता है कि लोगों को इस बीमारी और इससे बचने के तरीकों को लेकर जागरूक किया जा सके। तो चलिए आपको इस दिन के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।
क्यो मनाया जाता है ये दिन?
अगर बात ये की जाए कि आखिर विश्व कैंसर दिवस क्यों मनाया जाता है, तो इसके पीछे उद्देश्य ये है कि आम लोगों को कैंसर के खतरों के बारे में जागरुक और इसके लक्षण से लेकर इसके बचाव के बारे में जानकारी दी जा सके। कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि कैंसर छूने से भी फैलता है, जिसके कारण लोग कैंसर के रोगियों से अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि ये धारणा पूरी तरह गलत है। हमें इन मरीजों से भेदभाव करने की जगह उनका साथ देना चाहिए।

इस साल ये है थीम
साल 1933 से विश्व कैंसर दिवस को मनाने की शुरुआत के साथ ही समय-समय पर इसके लिए अलग थीम रखी जाती है। वहीं, बात अगर इस साल की करें तो इस बार इसकी थीम है ‘मैं हूं और मैं रहूंगा।’ इस थीम को साल 2019 से लेकर 2021 तक के लिए रखा गया है यानी पूरे तीन साल के लिए। विश्व कैंसर दिवस सबसे पहले साल 1993 में जिनेवा, स्विट्जरलैंड में यूनियन फॉर इंटरनेशल कैंसर कंट्रोल के द्वारा मनाया गया था और इसके बाद ये सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया।
इतने तरीकों का होता है कैंसर
कैंसर कोई आम बीमारी नहीं है, बल्कि ये एक गंभीर बीमारी है। कई लोग इससे जंग जीत जाते हैं, तो कई लोग जिंदगी की रेस में हार भी जाते हैं और इस बीमारी के कारण उनकी जान चली जाती है। कैंसर भी कई तरह के होते हैं। इनमें स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत) कैंसर, बोन कैंसर, मुंह का कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है।
महंगा होता है इलाज
जिस किसी को भी कैंसर की बीमारी होती है, उसका इलाज काफी लंबा चलता है। इसके लिए कई लोगों को तो विदेश तक जाना पड़ता है। बड़े-बड़े अस्पतालों की महंगी फीस देने के बाद भी कई लोग बच नहीं पाते। कई दवाओं से लेकर लंबा इलाज इस बीमारी में चलता है। लेकिन अगर हम इस बीमारी के शिकार होते हैं, तो हमें कभी अंदर से हार नहीं माननी चाहिए। इससे बचने के लिए आपको शराब का सेवन नहीं करना चाहिए और फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए।

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